महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी ने छात्रों से तथ्यों की जांच के बाद ही राय बनाने की अपील की, विपक्ष की भूमिका पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली में NEET परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 20 जुलाई की रात प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद आंदोलन ने और तूल पकड़ लिया है। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा फडणवीस ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों और युवाओं के नाम संदेश जारी कर सोच-समझकर किसी भी आंदोलन या ट्रेंड का हिस्सा बनने की सलाह दी है।
‘ट्रेंड देखकर समर्थन न करें’
दिविजा फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन युवाओं को किसी भी सोशल मीडिया ट्रेंड का बिना तथ्यों की जांच किए समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विचारधारा के प्रभाव में आकर अपनी निष्पक्ष सोच और तर्क क्षमता को खोना उचित नहीं है।
पहले तथ्यों को समझें
उन्होंने छात्रों से अपील की कि किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर अपनी अंतिम राय बनाने या सड़कों पर उतरने से पहले उसके पीछे के तथ्य, कारण और उद्देश्य की गहराई से जांच करें। उनका कहना था कि भावनाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना अधिक जरूरी है।
विपक्ष की जिम्मेदारी पर भी टिप्पणी
दिविजा फडणवीस ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में सकारात्मक सुझाव देना और जनहित के फैसलों में सहयोग करना भी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।
‘छात्रों के हित तक सीमित रहे आंदोलन’
NEET आंदोलन पर अपनी राय रखते हुए दिविजा ने कहा कि जब तक यह आंदोलन छात्रों के भविष्य, अधिकारों और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग तक सीमित है, तब तक यह पूरी तरह उचित है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आंदोलनों को धार्मिक या अन्य असंबंधित मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश होती है, तो संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को सतर्क हो जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य जनहित होना चाहिए और उसका मूल मुद्दा नहीं भटकना चाहिए।

