भारतीय वायदा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते कीमती धातुओं पर भारी दबाव देखने को मिला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं और निवेशकों की बिकवाली ने सोने-चांदी की कीमतों को नीचे धकेला है।
फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों की रणनीति बदल दी है।
कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और निवेश बैंकों ने भी सोने के भविष्य के अनुमान में कटौती की है। वहीं, गोल्ड ईटीएफ से लगातार निकासी होने के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है।
MCX पर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार को सोने के वायदा भाव में 1,478 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद सोना 1,40,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में कुल 7,482 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, अपने ऑल टाइम हाई 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले सोना 52,396 रुपये तक सस्ता हो चुका है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
चांदी में भी बिकवाली का दबाव
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। MCX पर चांदी के भाव में 11,298 रुपये की कमजोरी दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव 2,10,737 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
बीते तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल 21,728 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, अपने ऑल टाइम हाई 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले चांदी 2,09,311 रुपये तक सस्ती हो चुकी है।
डॉलर इंडेक्स की मजबूती बनी प्रमुख वजह
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती कीमती धातुओं की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण है। डॉलर के मजबूत होने से सोना और चांदी जैसे कमोडिटी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता ने भी बाजार में दबाव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी का रुख देखने को मिला है।
तीन साल की तेजी पर लगा ब्रेक
पिछले तीन वर्षों के दौरान सोने ने निवेशकों को लगातार मजबूत रिटर्न दिया था और कई बार नए रिकॉर्ड स्तर भी बनाए थे। हालांकि, इस साल की शुरुआत के बाद से बाजार में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतकों, डॉलर की दिशा और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर आगे की चाल निर्भर करेगी। फिलहाल सोने और चांदी में जारी गिरावट ने निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत दिया है।

