गोलकोंडा के 18 सीडी इलाके में स्पोर्ट्स ग्राउंड के पास मिली सुरंग, एएसआई करेगा मौके का निरीक्षण; स्थानीय लोगों और इतिहासकारों में बढ़ी उत्सुकता
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में करीब 400 साल पुराने कुतुब शाही मकबरों के परिसर में एक बड़ी सुरंग मिलने से चर्चा तेज हो गई है। यह सुरंग गोलकोंडा के 18 सीडी इलाके में खुदाई के दौरान सामने आई है। सुरंग मिलने के बाद स्थानीय लोगों और इतिहासकारों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, परिसर के स्पोर्ट्स ग्राउंड में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से खुदाई किए जाने के आरोपों को लेकर मामला विवादों में भी आ गया है।
कारवां के विधायक कौसर मोहिउद्दीन ने परिसर में हुई खुदाई को लेकर जानकारी साझा की है। विधायक के मुताबिक, उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के कहने पर मामले की जानकारी देने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षक से बातचीत की है। एएसआई अधिकारियों ने कहा है कि वे मौके का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि खुदाई कहां और किस वजह से की गई और इसी दौरान सुरंग कैसे सामने आई।
इलाके में बनाया जाएगा पुलिस पिकेट
विधायक कौसर मोहिउद्दीन ने हैदराबाद के कलेक्टर, हैदराबाद पुलिस कमिश्नर और दक्षिण-पश्चिम जोन के डीसीपी का ध्यान भी मामले की ओर दिलाया है। बताया जा रहा है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में पुलिस पिकेट बनाया जाएगा।
इस बीच यह दावा भी किया जा रहा है कि खुदाई आर्मी अधिकारियों की ओर से की गई थी। हालांकि, फिलहाल इसे केवल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एएसआई की ओर से मौके का निरीक्षण किए जाने के बाद ही खुदाई और सुरंग से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों और इतिहासकारों की बढ़ी उत्सुकता
कुतुब शाही मकबरों जैसे ऐतिहासिक स्थल के पास सुरंग मिलने की खबर से स्थानीय लोगों के साथ ही इतिहासकारों की उत्सुकता भी बढ़ गई है। शुरुआती तौर पर इसे कुतुब शाही काल से जुड़ी सुरंग माना जा रहा है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि सुरंग कितनी पुरानी है, इसका निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था और इसका कुतुब शाही शासनकाल से क्या संबंध है। अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने के बाद ही सुरंग की उम्र, संरचना और संभावित ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।

