अमित शाह ने साबरमती से देश की पहली एलएनजी-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। नई तकनीक से डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आने और हर साल लाखों रुपये की बचत का अनुमान है।
अहमदाबाद, 26 सितंबर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती से देश की पहली एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भारतीय रेल पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कारों में एलएनजी आधारित फ्यूल सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। इस तकनीक में एक ही इंजन एलएनजी और डीजल दोनों ईंधन पर चल सकता है।
2000 किलोमीटर से ज्यादा हुआ ट्रायल
इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेल ने 1400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को एलएनजी-डीजल डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला है। दोनों कन्वर्टेड डीपीसी पर 2000 किलोमीटर से ज्यादा का फील्ड ट्रायल किया जा चुका है।
रेलवे के मुताबिक, इस तकनीक के इस्तेमाल से डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। एलएनजी से चलने वाली इस ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री यानी आईसीएफ ने तैयार किया है।
एलएनजी खत्म होने पर भी डीजल से चलेगी ट्रेन
यह ट्रेन पूरी तरह एलएनजी पर निर्भर नहीं है। इसका इंजन जरूरत और ईंधन की उपलब्धता के अनुसार एलएनजी या डीजल पर चल सकता है। यानी एलएनजी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी ट्रेन का संचालन जारी रखा जा सकेगा।
इसे आसान भाषा में सीएनजी कार के उदाहरण से समझा जा सकता है। जिस तरह सीएनजी कार में सीएनजी और पेट्रोल के बीच स्विच किया जा सकता है, उसी तरह इस ट्रेन में भी एलएनजी और डीजल के बीच बदलाव संभव है।
डीजल की खपत के साथ प्रदूषण भी होगा कम
एलएनजी आधारित डुअल-फ्यूल सिस्टम का उद्देश्य केवल डीजल की खपत कम करना नहीं है, बल्कि प्रदूषण में भी कमी लाना है। इस तकनीक से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हर साल लाखों रुपये की बचत का अनुमान
एलएनजी की कीमत डीजल की तुलना में कम होने के कारण रेलवे को ईंधन खर्च में भी बचत हो सकती है। भारतीय रेलवे के अनुमान के अनुसार, एक डीपीसी से हर साल करीब 11.9 लाख रुपये की बचत हो सकती है।
इसी आधार पर आठ डिब्बों वाली एक ट्रेन से सालाना करीब 23.9 लाख रुपये तक की बचत होने का अनुमान है।
एक टैंक में करीब 440 किलोमीटर का सफर
भारतीय रेल ने प्रत्येक डीपीसी में करीब 2200 लीटर क्षमता वाला एलएनजी टैंक लगाया है। इसमें लगभग 950 से 1000 किलोग्राम एलएनजी भरी जा सकती है। इतनी एलएनजी के साथ ट्रेन करीब 440 किलोमीटर तक सफर कर सकती है।
डुअल-फ्यूल सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एलएनजी के इस्तेमाल के बावजूद डीजल इंजन जैसी पावर, विश्वसनीयता और प्रदर्शन बनाए रखा जा सके।
भाप से एलएनजी तक पहुंचा भारतीय रेल का सफर
भारतीय रेल लगातार वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा तकनीकों पर काम कर रही है। इससे पहले 2015 में सीएनजी से चलने वाली ट्रेन शुरू की गई थी। 17 जुलाई 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का भी उद्घाटन किया गया था, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाना है।
अब एलएनजी तकनीक के जुड़ने के साथ भारतीय रेल के ईंधन का सफर भाप से डीजल, बिजली, सीएनजी और हाइड्रोजन होते हुए एलएनजी तक पहुंच गया है।

