Jamner नगराध्यक्ष चुनाव पर विवाद, MVA ने EC पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जलगांव जिले की जामनेर नगर परिषद सुर्खियों में आ गई है। नगराध्यक्ष पद पर मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन के निर्विरोध चुने जाने के बाद महाविकास आघाड़ी (MVA) ने गंभीर आपत्ति जताई है।
MVA ने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा अचानक नियम बदले जाने के कारण उनकी उम्मीदवार ज्योत्सना विस्पुते का नामांकन खारिज कर दिया गया। अब यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचने जा रहा है।
भाजपा का निर्विरोध पैटर्न और विपक्ष का आरोप
भाजपा की ओर से दावा किया गया है कि अब तक 3 नगराध्यक्ष और 100 नगरसेवक भाजपा के निर्विरोध चुने जा चुके हैं। हालांकि, विपक्ष ने इस पैटर्न पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई सीटों पर जोरदार मुकाबला होने के बावजूद प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण अन्य उम्मीदवारों के रास्ते रोके जा रहे हैं।
MVA का दावा—नियमों में अचानक बदलाव से फॉर्म रद्द
MVA नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि–
- ज्योत्सना विस्पुते का नामांकन पहले एलिजिबल था
- लेकिन अचानक नियम बदलकर 1 के बजाय 5 नॉमिनेटर्स अनिवार्य कर दिए गए
- जिस कारण उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया
एनसीपी (एसपी) के नेता दिलीप खोडपे ने कहा कि यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने 18 नवंबर को अचानक नया आदेश जारी किया, जबकि पहले 17 नवंबर तक 1 नॉमिनेटर की ही आवश्यकता थी।
हाई कोर्ट जाएगी MVA उम्मीदवार
MVA उम्मीदवार ज्योत्सना विस्पुते ने मांग की है कि—
- 18 नवंबर का आदेश रद्द किया जाए
- 17 नवंबर का आदेश पुनः लागू किया जाए
उन्होंने बताया कि मामला अब हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर पीठ में ले जाया जाएगा।
नियम बदलाव से कई उम्मीदवार प्रभावित
MVA नेताओं का दावा है कि सिर्फ जामनेर में ही नहीं, बल्कि राज्यभर में नियमों में बदलाव के कारण कई उम्मीदवारों के फॉर्म इनएलिजिबल हो गए हैं।
विपक्ष का कहना है कि यह कदम भाजपा के निर्विरोध जीत के पैटर्न को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

