प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व बताया।
पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर क्या कहा?
15 अगस्त को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के बदलते स्वरूप का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार की कार्रवाई के चलते जंगलों में सक्रिय नक्सलवाद और उग्रवाद को काफी हद तक खत्म किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों से नक्सली गतिविधियां कम हुई हैं, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी सक्रिय हैं। उन्होंने ऐसी माओवादी मानसिकता वाले लोगों को पहचानने की जरूरत बताई, जो संस्थानों में रहकर नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
पी. चिदंबरम ने कहा- ‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है’
प्रधानमंत्री के बयान के अगले दिन कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “I am proud to be a dimagi naxal!” यानी उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।
चिदंबरम का यह बयान प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सीधा राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।
जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को प्रधानमंत्री की हताशा से जोड़ते हुए कहा कि इससे पहले सरकार के आलोचकों के लिए ‘शहरी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि जब संसद में ‘शहरी नक्सल’ की परिभाषा को लेकर सवाल पूछा गया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माना था कि कानून में इसकी कोई परिभाषा नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले जिन मांगों या विचारों को ‘शहरी नक्सली सोच’ बताती है, बाद में उन्हीं में से कुछ को स्वीकार कर लेती है। उन्होंने जाति जनगणना का उदाहरण देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
विपक्ष को राष्ट्र-विरोधी बताने की कोशिश का आरोप
कांग्रेस के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उनकी पार्टी नक्सलवाद और उसकी हिंसक राजनीति का विरोध करती है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के शब्दों के जरिए राजनीतिक विरोधियों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री के बयान और विपक्ष की प्रतिक्रियाओं के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां इसे देश की सुरक्षा और वैचारिक चुनौतियों से जोड़कर देख रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक असहमति को निशाना बनाने वाला बयान बता रहा है।

