कमजोर रुपया बना विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी, फीस न बढ़ने पर भी खर्च क्यों बढ़ रहा?

Thecity news
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पिछले एक साल से विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की एक शिकायत लगातार सामने आ रही है। कॉलेज की फीस नहीं बढ़ी, न ही किराया या लाइफस्टाइल में कोई बड़ा बदलाव हुआ, फिर भी डिग्री लेना दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। यह परेशानी सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पैरेंट्स के लिए भी चिंता का बड़ा कारण बन चुकी है।

कई अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लिया या अपनी सालों की जमा पूंजी खर्च की, लेकिन अब बढ़ता खर्च उनके बजट से बाहर जाता दिख रहा है।

कमजोर रुपया बना असली वजह

2026 में विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती न तो ट्यूशन फीस है और न ही महंगा रेंट, बल्कि लगातार कमजोर होता भारतीय रुपया है। डॉलर, पाउंड और यूरो के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत ने पढ़ाई के कुल खर्च को अपने आप बढ़ा दिया है।

पिछले एक साल में यह बदलाव धीरे-धीरे हुआ, इसलिए शुरुआत में ज्यादातर स्टूडेंट्स और पैरेंट्स को इसका अंदाजा नहीं लगा।

कैसे बढ़ रहा है खर्च?

उदाहरण के तौर पर, दो साल पहले अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई का कुल खर्च करीब 40 लाख रुपये था। आज वही खर्च 45 से 48 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जबकि कोर्स फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

अगर किसी छात्र का सालाना खर्च 40 हजार डॉलर है और डॉलर 75 रुपये का है, तो कुल खर्च करीब 30 लाख रुपये होता है। लेकिन डॉलर के 83–85 रुपये पहुंचते ही यही खर्च 33–34 लाख रुपये हो जाता है। दो साल की पढ़ाई में यह अंतर 6 से 8 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

कहां हो रही है सबसे बड़ी चूक?

अक्सर विदेश में पढ़ाई की योजना बनाते समय पूरा बजट रुपये में तय कर लिया जाता है। यह नहीं सोचा जाता कि ट्यूशन फीस, किराया, हेल्थ इंश्योरेंस और रोजमर्रा का खर्च विदेशी मुद्रा में होता है।

जैसे ही रुपया कमजोर होता है, बिना किसी बदलाव के खर्च अपने आप बढ़ जाता है और पूरा फाइनेंशियल प्लान गड़बड़ा जाता है।

गलत फाइनेंशियल प्लानिंग बन रही परेशानी

स्टूडेंट्स और पैरेंट्स अक्सर मान लेते हैं कि खर्च एक बार का होगा, जबकि हकीकत यह है कि विदेश में पढ़ाई कई सालों तक चलने वाली प्रक्रिया है। इस दौरान एक्सचेंज रेट, महंगाई और ब्याज दरें लगातार बदलती रहती हैं।

अगर रुपये में सिर्फ 3–4% की गिरावट आ जाए, तो पूरा बजट बिगड़ सकता है और आगे की पढ़ाई संकट में पड़ सकती है।

क्या हो सही फाइनेंशियल प्लानिंग?

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि विदेश में पढ़ाई की प्लानिंग करते समय मौजूदा एक्सचेंज रेट को आधार न बनाएं। यह मानकर चलें कि भविष्य में रुपया और कमजोर हो सकता है।

अपने बजट का स्ट्रेस टेस्ट जरूर करें। यानी यह जांचें कि अगर रुपया और गिरता है, तब भी क्या आप पढ़ाई का खर्च उठा पाएंगे। अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो संभव है कि वह देश या कोर्स आपके लिए सही विकल्प न हो, भले ही अभी वह बजट में फिट बैठता दिख रहा हो।

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