महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी एक बार फिर तेज हो गई है।
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) पर जोरदार हमला बोला है।
राऊत ने कहा,
“अगर राज्य या देश के किसी खास विभाग की सत्ता मेरे हाथ में आई, तो मैं बीजेपी के 15 टुकड़े कर दूंगा। उन्हें पता भी नहीं चलेगा कि ये टुकड़े कहां गए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अब केवल ईडी, सीबीआई और पुलिस के सहारे चल रही है और पार्टी का पूरी तरह से कांग्रेसीकरण हो चुका है। राऊत के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कई लोग भी अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
⚔️ ‘शिंदे विकृति है, उसे खत्म करना जरूरी’
संजय राऊत ने एकनाथ शिंदे गुट पर हमला तेज करते हुए कहा कि—
“हमने 25 साल बीजेपी के साथ काम किया, लेकिन शिंदे कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं, बल्कि एक विकृति हैं। विकृति को जड़ से खत्म करना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि यदि सत्ता उनके हाथ में आई, तो एकनाथ शिंदे जैसी विकृति का महाराष्ट्र की राजनीति में अस्तित्व नहीं रहेगा।
⚖️ CJI के स्वागत पर आपत्ति
एकनाथ शिंदे द्वारा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के फूलों से स्वागत पर भी राऊत ने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि
“जिनके सामने आपका मामला चल रहा है, उनके सामने इस तरह झुकना महाराष्ट्र की गरिमा के अनुकूल नहीं है।”
🏙️ ‘मराठी लोग आज भी ठाकरे के साथ’
मुंबई महानगरपालिका चुनावों को लेकर राऊत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ मराठी जनता खड़ी है।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की संयुक्त ताकत ने 71 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को केवल गैर-महाराष्ट्रीयन बहुल इलाकों में समर्थन मिला।
राऊत ने चेतावनी देते हुए कहा—
“मुंबई के लिए लड़ने वाली यह हमारी आखिरी पीढ़ी है। केंद्र की सत्ता मुंबई के महत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।”
🏹 शिंदे से छीने जाएगा धनुष-बाण चिन्ह?
मुंबई मेयर पद को लेकर जारी घमासान के बीच संजय राऊत ने बड़ा दावा किया है।
उन्होंने कहा कि
- आगामी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद
- चुनाव आयोग धनुष-बाण चिन्ह को फ्रीज कर सकता है
- इसी डर से अदालत में सुनवाई टालने की कोशिश की जा रही है
राऊत ने यह भी कहा कि आने वाले समय में एकनाथ शिंदे को बीजेपी में विलय करना पड़ेगा, क्योंकि सत्ता किसी को हमेशा के लिए नहीं मिलती।
🔥 राजनीति में फिर तेज होगा घमासान
संजय राऊत के इन विवादास्पद बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप और सियासी हलचल तेज होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

