सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने कहा- भारत की चिप स्टोरी अब प्रोजेक्ट के ऐलान तक सीमित नहीं, देश कमर्शियल प्रोडक्शन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की रणनीति अब सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं रह गई है। देश अब चिप डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण और सिस्टम से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को भारत में विकसित करने पर जोर दे रहा है।
गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर मुहिम अब केवल परियोजनाओं के ऐलान या फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश कमर्शियल प्रोडक्शन की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
पीएम मोदी ने प्राइवेट सेक्टर से रिसर्च में निवेश बढ़ाने की अपील भी की। सरकार का मानना है कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए केवल कुछ फैब या पैकेजिंग यूनिट पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि चिप के आसपास पूरी सप्लाई चेन और मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार करना जरूरी है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से सेमीकंडक्टर तक भारत का सफर
भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की रणनीति को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में हुई तेज वृद्धि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014-15 में करीब 38,000 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट हुआ था, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भी भारत ने तेजी से विस्तार किया है। 2014 में स्मार्टफोन देश के शीर्ष 100 एक्सपोर्ट आइटम में शामिल नहीं था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में यह भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट आइटम बन गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब देश में ही बनाए जाते हैं।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से करीब 12 लाख लोगों को रोजगार मिलने की बात कही गई है। वहीं, पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से 25 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम से शुरू हुई बड़ी पहल
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया था। इसके लिए 76,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ चिप निर्माण इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि चिप डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण और कुशल प्रतिभाओं का विकास करना भी था।
अब सरकार ने इसके अगले चरण की दिशा में कदम बढ़ाया है। जुलाई 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
यह कार्यक्रम छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है- चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण, फैब्रिकेशन फैसिलिटी, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट।
1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश वाले प्रोजेक्ट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाले 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।
इन परियोजनाओं में माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी जैसी कंपनियां शामिल हैं। स्रोत सामग्री के अनुसार, इन कंपनियों ने भारत में कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया है।
इस बदलाव को भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, क्योंकि अब फोकस केवल निवेश आकर्षित करने और फैक्ट्री स्थापित करने से आगे बढ़कर उत्पादन और बाजार तक पहुंचने पर है।
चिप डिजाइन और टैलेंट पर भी जोर
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में फैक्ट्री के अलावा चिप डिजाइन, वेरीफिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग भी महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसके लिए विशेष मशीनों, केमिकल, गैस, सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत होती है।
भारत में इसी दिशा में 2022 में चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य 85,000 प्रोफेशनल्स को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए तैयार करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सैकड़ों कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में छात्रों को चिप डिजाइनिंग से जुड़े विशेष सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार ने 24 चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को आर्थिक सहायता भी दी है।
बेंगलुरु स्थित सी-डैक में बनाया गया चिपइन सेंटर भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। स्रोत सामग्री के अनुसार, यहां से 1 लाख से अधिक लोगों ने चिप डिजाइन के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया है और छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए 56 चिप तैयार किए गए हैं।
एआई और सेमीकंडक्टर का कनेक्शन
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। एआई सिस्टम के लिए शक्तिशाली और विशेष प्रकार के प्रोसेसर की जरूरत होती है। ऐसे में चिप निर्माण और एआई कंप्यूटिंग की जरूरतें एक-दूसरे से जुड़ती हैं।
इंडियाएआई मिशन के लिए सरकार ने 10,372 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जून 2026 तक 45,000 से ज्यादा जीपीयू की क्षमता तैयार होने की जानकारी दी गई है। अगस्त तक 237 प्रोजेक्ट्स इस कंप्यूटिंग क्षमता का इस्तेमाल कर चुके थे।
ग्लोबल सप्लाई चेन में जगह बनाने की तैयारी
कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की कमी ने चिप सप्लाई चेन की अहमियत को सामने ला दिया था। इसके बाद कई देशों और कंपनियों ने अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने पर जोर दिया।
भारत भी खुद को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के तौर पर नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
पैक्स सिलिका कोएलिशन जैसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए भी भारत वैश्विक नेटवर्क में अपनी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है। दीर्घकालिक लक्ष्य भारत में केवल घरेलू जरूरत के लिए चिप बनाना नहीं, बल्कि दुनिया के लिए चिप डिजाइन और निर्माण करने वाले प्रमुख इकोसिस्टम का हिस्सा बनना है।

