Share Market Crash: इजरायल-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी लुढ़का

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का वैश्विक बाजारों पर असर, रियल्टी, मेटल, ऑटो और आईटी शेयरों में बिकवाली तेज, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मुंबई: मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट देखने को मिली और दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

बीएसई सेंसेक्स 718 अंकों की गिरावट के साथ 73,421.61 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी करीब 250 अंक टूटकर 23,118.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

इजरायल-ईरान संघर्ष बना गिरावट की बड़ी वजह

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गिरावट की मुख्य वजह इजरायल और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव है। रविवार देर रात ईरान और हिजबुल्लाह की ओर से इजरायल के कई क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए, जिसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

मिडिल ईस्ट में संघर्ष के फिर से तेज होने से वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार सहित दुनिया भर के इक्विटी बाजारों पर देखने को मिला। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया।

रियल्टी, मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

सोमवार के कारोबार में अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा दबाव रियल्टी सेक्टर पर रहा, जहां करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसके अलावा मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। प्रमुख नुकसान उठाने वाले शेयरों में Wipro, Tata Consultancy Services, Tata Steel, Hindalco Industries, JSW Steel, Bajaj Finance और Shriram Finance शामिल रहे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली

बाजार में कमजोरी केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100, मिडकैप 150 और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बढ़ती अनिश्चितता के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव का स्तर भी तेजी से बढ़ा। भारत का वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) करीब 15 प्रतिशत उछलकर 18 के आसपास पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

एशियाई बाजारों में भी दिखा नकारात्मक रुख

भारतीय बाजार की तरह एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। जापान का Nikkei 225 करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।

वहीं, Hang Seng Index में भी करीब 1 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude करीब 4 प्रतिशत उछलकर 96.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) में 4.64 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 94.75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई और बाजार की दिशा पर भी असर डाल सकती हैं।

फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर बनी हुई है।

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