SSC CGL 2026: परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव, अब सेक्शनल टाइमिंग के हिसाब से देने होंगे जवाब

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SSC CGL Exam Pattern 2026: कर्मचारी चयन आयोग ने कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया है। नए नियम के तहत टियर-1 और टियर-2 परीक्षा में सेक्शनल टाइमिंग लागू की गई है। अब अभ्यर्थी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी सेक्शन में आगे-पीछे जाकर सवाल हल नहीं कर सकेंगे।

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) भर्ती देश की प्रमुख सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में प्रतियोगिता काफी कठिन रहती है। कई अभ्यर्थी वर्षों से SSC CGL की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा पैटर्न में हुए बदलाव को समझना उनके लिए बेहद जरूरी हो गया है।

SSC CGL का पुराना परीक्षा पैटर्न

SSC ने जून 2026 में CGL परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है। पुराने पैटर्न की बात करें तो SSC CGL टियर-1 में 100 सवालों को हल करने के लिए कुल 60 मिनट का समय दिया जाता था। चारों विषयों के लिए एक ही समय सीमा निर्धारित थी। अभ्यर्थी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विषय के सवाल पहले या बाद में हल कर सकते थे।

वहीं, SSC CGL टियर-2 में सेक्शन-1 और सेक्शन-2 के कुल 130 सवालों को हल करने के लिए दो घंटे का समय दिया जाता था। अभ्यर्थियों को सवाल हल करने का क्रम चुनने की सुविधा थी। वे आसान सवाल पहले और कठिन सवाल बाद में हल कर सकते थे।

नए नियम में लागू हुई सेक्शनल टाइमिंग

जून 2026 से SSC CGL परीक्षा के संशोधित पैटर्न में सेक्शनल टाइमिंग लागू की गई है। अब टियर-1 में प्रत्येक विषय के लिए 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। वहीं, टियर-2 में सेक्शन-1 और सेक्शन-2 के सवालों के लिए अलग-अलग समय सीमा तय की गई है।

नए नियम के बाद अभ्यर्थी अपनी इच्छा के अनुसार किसी दूसरे विषय के सवालों पर नहीं जा सकेंगे। एक बार किसी सेक्शन का निर्धारित समय पूरा होने या उसे सबमिट करने के बाद उस सेक्शन पर दोबारा वापस जाने की अनुमति नहीं होगी।

अब विषयवार हल करने होंगे सवाल

संशोधित SSC CGL परीक्षा पैटर्न के अनुसार अभ्यर्थियों को निर्धारित क्रम और समय सीमा के अनुसार सवाल हल करने होंगे। प्रत्येक विषय और सेक्शन के लिए तय समय का पालन करना जरूरी होगा।

इस बदलाव का सीधा असर परीक्षा की रणनीति पर पड़ेगा। अब अभ्यर्थियों को केवल सवाल हल करने की गति ही नहीं, बल्कि हर विषय के लिए अलग से समय प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा।

मॉक टेस्ट से करें नए पैटर्न की तैयारी

नए परीक्षा पैटर्न के कारण अभ्यर्थियों के सामने समय प्रबंधन की नई चुनौती पैदा हुई है। ऐसे में उन्हें नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने चाहिए। मॉक टेस्ट के दौरान सेक्शनल टाइमर का इस्तेमाल करना तैयारी के लिए अधिक उपयोगी रहेगा।

इससे अभ्यर्थियों को निर्धारित समय में सवाल हल करने की आदत पड़ेगी। साथ ही वे यह भी समझ सकेंगे कि प्रत्येक विषय में उनकी व्यावहारिक गति कितनी है। नियमित अभ्यास से परीक्षा के दौरान दबाव को संभालने और समय के भीतर सेक्शन पूरा करने की क्षमता बेहतर की जा सकती है।

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