उत्तर प्रदेश समेत देशभर के प्राथमिक शिक्षकों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने और इसे पुरानी तारीख (बैक डेट) से लागू करने के फैसले को लेकर भारी नाराजगी है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। संघ ने ‘जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत करीब 25 लाख शिक्षक एकजुट होकर अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों से जवाब मांगेंगे।
‘जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो’ अभियान से बढ़ेगा आंदोलन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार, देशभर के लाखों शिक्षक इस अभियान में शामिल होंगे। शिक्षक अपने जनप्रतिनिधियों का घेराव कर TET अनिवार्यता, सेवा सुरक्षा और अन्य लंबित मुद्दों पर उनका रुख स्पष्ट करने की मांग करेंगे। संगठन का आरोप है कि इतने बड़े संकट के बावजूद राजनीतिक नेतृत्व पूरी तरह मौन बना हुआ है।
जुलाई में विद्यालयों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार की चेतावनी
संघ के जिलामंत्री डॉ. शैलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि न्यायपालिका के फैसले और उसके बाद सरकार तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने शिक्षकों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो जुलाई में विद्यालयों में तालाबंदी की जाएगी। इसके साथ ही शिक्षक सभी प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा सीधे उनके रोजगार और भविष्य से जुड़ा है।
क्या है TET विवाद?
सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। हाल ही में कोर्ट ने TET पास करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 तक कर दी है। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच वर्ष या उससे कम समय शेष है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। शिक्षकों का आरोप है कि पुराने नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम लागू करना उनके साथ अन्याय है और इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
राज्य अध्यापक पुरस्कार को लेकर भी बना संशय
TET विवाद का असर राज्य अध्यापक पुरस्कार की प्रक्रिया पर भी दिखाई दे रहा है। वाराणसी में 7 जून से पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू होने जा रहे हैं, लेकिन शिक्षकों के बीच इसे लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नौकरी की वैधता पर ही संकट मंडरा रहा है, तब पुरस्कार के लिए आवेदन मांगना उचित नहीं लगता।
पात्रता और सेवा विस्तार पर उठ रहे सवाल
शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि मौजूदा परिस्थितियों में किन शिक्षकों के आवेदन वैध माने जाएंगे। इसके अलावा, पहले राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त कर चुके शिक्षकों को मिलने वाले दो वर्ष के सेवा विस्तार का लाभ जारी रहेगा या नहीं, इसको लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। संगठन ने सरकार से इन सभी बिंदुओं पर जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

