टॉक्सिक मूवी रिव्यू: यश की फिल्म में एक्शन, अंडरवर्ल्ड और इमोशन का जबरदस्त तड़का, 3.5 स्टार की हकदार

Thecity news
5 Min Read

सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद रॉकिंग स्टार यश बड़े पर्दे पर लौटे हैं और इस बार उनका अंदाज पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और दमदार नजर आता है। प्रतिभावान निर्देशक गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस भव्य फिल्म का निर्माण मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस और केवीएन प्रोडक्शंस के बैनर तले खुद यश और वेंकट के। नारायण ने किया है।

यह फिल्म सिर्फ एक सामान्य एक्शन ड्रामा नहीं है, बल्कि पावर, बगावत, खतरनाक अंडरवर्ल्ड, प्यार, परिवार और गहरे जज्बातों की कहानी है। फिल्म पहले फ्रेम से आखिरी सेकंड तक दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म को 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं।

कहानी और क्लाइमैक्स

‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक साधारण एक्शन ड्रामा कहना इसके साथ नाइंसाफी होगी। फिल्म दर्शकों को अपराध और ताकत के एक ऐसे अंधेरे साम्राज्य में ले जाती है, जहां गोलियों की गूंज के साथ प्यार, वफादारी और परिवार की संवेदनशील जंग भी चलती है।

कहानी की शुरुआत खतरनाक गैंगस्टर राया से होती है, जिसके लिए वफादारी ही सबसे बड़ी चीज है। लेकिन जब उसके बेटे टिकट की एंट्री होती है, तो कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। राया की जिंदगी से जुड़े कई अनकहे राज, अतीत के पन्ने और रिश्तों की उलझनें धीरे-धीरे सामने आती हैं।

नादिया और गंगा जैसे किरदार कहानी को मजबूत भावनात्मक आधार देते हैं। जैसे-जैसे सेकंड हाफ आगे बढ़ता है, संघर्ष और ज्यादा हिंसक और वास्तविक होता जाता है। जब लगता है कि कहानी की दिशा समझ आ गई है, तभी क्लाइमैक्स एक अप्रत्याशित मोड़ लेकर आता है, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के दिमाग में घूमता रहता है।

अभिनय

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सुपरस्टार यश का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और दोहरा किरदार है। यश ने दो अलग-अलग पीढ़ियों के किरदारों को अलग तेवर के साथ निभाया है। राया के किरदार में उनका खौफनाक ठहराव नजर आता है। कई मौकों पर बिना कुछ कहे सिर्फ उनकी आंखें ही किरदार की दहशत को बयां कर देती हैं।

वहीं बेटे टिकट के रूप में यश बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आते हैं। उनका बेकाबू, खतरनाक और हाई-एनर्जी अवतार थिएटर में सीटी बजाने वाले कई पल देता है। दोनों किरदारों की बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल में अंतर दिखाने में यश सफल रहे हैं।

सपोर्टिंग कास्ट भी फिल्म को मजबूत बनाती है। नयनतारा ने गंगा के किरदार में कहानी को भावनात्मक आधार दिया है। कियारा आडवाणी नादिया के रूप में प्यार और मासूमियत लेकर आती हैं। हुमा कुरैशी एलिजाबेथ के किरदार में अपनी खास ठसक दिखाती हैं, जबकि रुक्मिणी वसंत मेलिसा के रूप में अपने सादगी भरे अंदाज से प्रभावित करती हैं।

तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डैरेल डी’सिल्वा और सुदेव नायर ने भी अंडरवर्ल्ड की दुनिया को प्रभावशाली और खौफनाक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

निर्देशन, एक्शन और संगीत

गीतू मोहनदास ने बड़े कैनवास की मास-एक्शन फिल्म में भावनात्मक गहराई और स्टोरीटेलिंग को अच्छी तरह पिरोया है। फिल्म का पहला हाफ शतरंज के खेल जैसा महसूस होता है, जहां सत्ता और वफादारी के मोहरे धीरे-धीरे अपनी जगह लेते हैं।

इंटरवल ब्लॉक फिल्म के सबसे प्रभावशाली हिस्सों में से एक है। इसके बाद सेकंड हाफ सीधे पांचवें गियर में पहुंच जाता है। एक्शन का स्केल बड़ा, ज्यादा रॉ और वाइल्ड हो जाता है।

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी इसके मास अपील को बढ़ाता है। दमदार साउंड डिजाइन और एक्शन सीक्वेंस मिलकर बड़े पर्दे पर शानदार असर पैदा करते हैं। करीब 3 घंटे 14 मिनट का यह सफर लंबा जरूर है, लेकिन फिल्म लगातार दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखने की कोशिश करती है।

अंतिम फैसला

‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ उन फिल्मों में शामिल है, जहां सीटीमार मास मोमेंट्स के साथ भावनात्मक कहानी भी देखने को मिलती है। यश का दमदार अंदाज, गैंगस्टर वर्ल्ड का थ्रिल और गीतू मोहनदास का भव्य विजन फिल्म को एक खास थिएट्रिकल अनुभव बनाता है।

अगर आप बड़े पर्दे पर एक्शन, अंडरवर्ल्ड, इमोशन और यश के जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस का अनुभव लेना चाहते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ थिएटर में देखने लायक फिल्म है। खासकर बड़े पर्दे और बेहतर साउंड सिस्टम पर इसका अनुभव ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

रेटिंग: ⭐⭐⭐½/5

Share This Article