उपशीर्षक: शिंदे गुट में सांसदों के शामिल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल, आदित्य ठाकरे ने नगरसेवकों से जनता के मुद्दों पर आक्रामक रहने और पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की अपील की।
महाराष्ट्र की राजनीति में छह लोकसभा सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी को अब अपने विधायकों और मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नगरसेवकों में संभावित टूट का भी खतरा सताने लगा है। इसी चुनौती से निपटने और संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए ठाकरे परिवार ने डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज कर दी है।
इसी सिलसिले में गुरुवार को मुंबई स्थित ठाकरे परिवार के आवास ‘मातोश्री’ में एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। बैठक की अगुवाई युवा सेना प्रमुख और विधायक आदित्य ठाकरे ने की। इसमें पार्टी के नगरसेवकों और प्रमुख नेताओं के साथ मौजूदा राजनीतिक हालात तथा आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
नगरसेवकों को पार्टी में बनाए रखने पर जोर
सूत्रों के अनुसार, हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व की सबसे बड़ी चिंता बीएमसी के पूर्व और मौजूदा नगरसेवकों को एकजुट बनाए रखना है। माना जा रहा है कि शिंदे गुट की नजर अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी है। इसी आशंका को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने संगठन के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय किया है और नगरसेवकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
बैठक में आदित्य ठाकरे ने सभी नेताओं से सत्ता के प्रलोभन से दूर रहने और जनता के बीच सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत जनता का विश्वास है और उसे मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति
बैठक में मुंबई में मानसून के दौरान जलभराव, खराब सड़कें, बिजली आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आदित्य ठाकरे ने नगरसेवकों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की विस्तृत सूची तैयार करें और उन्हें बीएमसी प्रशासन तथा राज्य सरकार के सामने मजबूती से उठाएं।
उन्होंने कहा कि हाल की भारी बारिश के दौरान मुंबई के लोगों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में पार्टी नेताओं को जनता की आवाज बनकर प्रशासन से जवाब मांगना चाहिए और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए लगातार दबाव बनाना चाहिए।
संगठन को मजबूत करने की कवायद
बैठक के दौरान पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना जरूरी है। नगरसेवकों से कहा गया कि वे अपने वार्डों में नियमित रूप से लोगों से संपर्क करें, स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाएं और पार्टी के प्रति कार्यकर्ताओं का भरोसा मजबूत करें।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सांसदों की बगावत के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सामने संगठन को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क कर संभावित टूट को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

