नोएडा-ग्रेटर नोएडा बने इलेक्ट्रॉनिक्स हब, मोबाइल निर्माण से लेकर सेमीकंडक्टर निवेश तक यूपी ने बनाई मजबूत पहचान
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनकर तेजी से उभर रहा है। राज्य में बनने वाले लगभग 65 प्रतिशत मोबाइल फोन अब पूरे देश की जरूरत पूरी कर रहे हैं। औद्योगिक विकास विभाग के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और निर्यात में हुई तेज वृद्धि ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में नई पहचान दिलाई है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में जहां इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग नगण्य था, वहीं वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह बढ़कर 2.58 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जो भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का 16.65 प्रतिशत है। वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत के 28.45 अरब अमेरिकी डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में उत्तर प्रदेश में निर्मित मोबाइल उपकरणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केवल स्मार्टफोन निर्यात ही 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा बने इलेक्ट्रॉनिक्स हब
अधिकारियों के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के आसपास विकसित मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। यहां सैमसंग, ओप्पो, वीवो, एलजी, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, ऑप्टीमस, पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, ज़ेटवर्क (ज़ेटटाउन) और भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स) जैसी प्रमुख कंपनियां मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का निर्माण कर रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन में भी अग्रणी
उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण में भी देश की रीढ़ बनकर उभरा है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। सैमक्वांग, होलीटेक, केएचवाई, ख्वाटेक, मिंडा कॉर्पोरेशन, जेवर्ल्ड, शिनसंग सी एंड टी, सनवोडा और ड्रीमटेक जैसी कंपनियां पीसीबीए, डिस्प्ले, कैपेसिटर समेत कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट का उत्पादन कर रही हैं। वहीं हायर और पैनासोनिक जैसी कंपनियां भी राज्य में अपने विनिर्माण का विस्तार कर रही हैं।
नीतियों से बढ़ा निवेश
औद्योगिक विकास विभाग का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2017, उसके बाद वर्ष 2020 और 2022 में किए गए संशोधनों तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में 75 से अधिक कंपनियों ने 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी मजबूत कदम
उत्तर प्रदेश ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य को 32,146 करोड़ रुपये के स्वीकृत निवेश मिले हैं, जिनमें जेवर के पास प्रस्तावित एचसीएल-फॉक्सकॉन डिस्प्ले ड्राइवर चिप प्लांट प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।
डिजिटल सेवाओं का भी तेजी से विस्तार
प्रदेश में वर्तमान में 1.85 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित हैं, जो 314 से अधिक ई-गवर्नेंस सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं 24 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं का बढ़ता उपभोक्ता आधार राज्य में घरेलू मांग को भी लगातार मजबूती दे रहा है।

