अमेरिकी संसद ने रिकॉर्ड रक्षा बजट को दी मंजूरी, AI, हाइपरसोनिक हथियार और मध्य पूर्व सुरक्षा पर होगा बड़ा निवेश
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) ने वित्तीय वर्ष के लिए 1.15 ट्रिलियन डॉलर (करीब 111 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड रक्षा बजट पारित किया है। यह राशि इतनी बड़ी है कि दुनिया के लगभग 178 देशों की पूरी अर्थव्यवस्था (GDP) भी इससे छोटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट अमेरिका की सैन्य शक्ति को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
178 देशों की GDP से बड़ा रक्षा बजट
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार दुनिया में केवल 17 देशों की जीडीपी ही 1.15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। अमेरिका, चीन, भारत, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे बड़े देशों को छोड़ दें तो बाकी करीब 178 देशों की पूरी अर्थव्यवस्था अमेरिकी रक्षा बजट से छोटी है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश से कई गुना बड़ा
अमेरिका का रक्षा बजट पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं से भी कई गुना बड़ा है।
- अमेरिकी रक्षा बजट: 1.15 ट्रिलियन डॉलर
- पाकिस्तान की अनुमानित GDP: 350–370 बिलियन डॉलर (अमेरिकी रक्षा बजट करीब 3.2 गुना)
- बांग्लादेश की अनुमानित GDP: 450–480 बिलियन डॉलर (करीब 2.5 गुना)
यानी पाकिस्तान अपनी पूरी अर्थव्यवस्था से सालभर में जितनी कमाई करता है, अमेरिका उससे तीन गुना से अधिक राशि सिर्फ रक्षा क्षेत्र पर खर्च करेगा।
कहां होगा सबसे ज्यादा खर्च?
मध्य पूर्व और ईरान: ईरान से बढ़ते तनाव, रेड सी की सुरक्षा और संभावित सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त फंड।
इंडो-पैसिफिक रणनीति: चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए नौसेना, लंबी दूरी की मिसाइलों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा।
AI और हाइपरसोनिक हथियार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ड्रोन, साइबर युद्ध क्षमता और हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश होगा।
परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण: पनडुब्बियों, रणनीतिक बॉम्बर्स और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों सहित अमेरिका के परमाणु ढांचे को आधुनिक बनाया जाएगा।
दुनिया और भारत पर क्या होगा असर?
वैश्विक सैन्य प्रतिस्पर्धा: अमेरिका और चीन के बीच हथियारों की होड़ और तेज हो सकती है, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरण प्रभावित होंगे।
ऊर्जा और व्यापार: मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार मार्गों पर असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: मजबूत अमेरिकी रक्षा निवेश से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा तकनीक, इंडो-पैसिफिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिल सकती है।
क्यों अहम है यह बजट?
विशेषज्ञों के अनुसार 1.15 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बजट केवल एक वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक सैन्य बढ़त बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई देश आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, अमेरिका का यह रिकॉर्ड रक्षा खर्च वैश्विक शक्ति संतुलन और सुरक्षा रणनीति में उसके बढ़ते निवेश को दर्शाता है। वहीं, ईरान और मध्य पूर्व में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले समय में इस बजट की रणनीतिक भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

