UPI Charges: ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर शुल्क को लेकर सियासत तेज, राहुल गांधी और खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना

Thecity news
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केंद्र के नए UPI शुल्क ढांचे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए निशाना साधा, जबकि खड़गे ने इसे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बताया। सरकार के मुताबिक ग्राहकों से सीधे एमडीआर नहीं लिया जाएगा।

यूपीआई के जरिए ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किए जाने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है और इसे अमेरिकी कंपनियों के दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। वहीं, खड़गे ने कहा कि अगर दुकानदारों पर शुल्क लगाया जाता है तो उसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

राहुल गांधी बोले- सरकार ने UPI पर शुल्क का रास्ता खोला

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार भले ही यह कह रही है कि ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदारों पर लगने वाला शुल्क आखिरकार किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप भी लगाया। राहुल गांधी का यह बयान राजनीतिक आरोप है, जबकि सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि यूपीआई के ग्राहकों पर सीधे एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।

खड़गे ने पूछा- क्या डिजिटल पेमेंट पर लगेगा नया टैक्स?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महंगाई के बीच आम आदमी की जेब पहले ही दबाव में है और ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त बोझ चिंता बढ़ा सकता है।

खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि अगर ₹5,000 के भुगतान पर ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 तक शुल्क लिए जाने की बात सामने आ रही है तो क्या यह सच है। उन्होंने इसे ‘डिजिटल पेमेंट टैक्स’ बताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

हालांकि, ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 यानी 0.5 प्रतिशत शुल्क वाली बात उस समय कांग्रेस के दावे के रूप में सामने आई थी। बाद में जारी आधिकारिक ढांचे के अनुसार ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर की दर 0.4 प्रतिशत तय की गई है।

सरकार ने क्या बदला है?

वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया कि ₹2,000 तक के यूपीआई लेन-देन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।

इसके बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने ₹2,000 से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M यूपीआई लेन-देन के लिए 0.4 प्रतिशत एमडीआर का ढांचा घोषित किया। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगा।

आम ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?

सबसे अहम बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। वहीं, ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन इस नए एमडीआर ढांचे से प्रभावित नहीं होंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट इस लागत को यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर न डालें।

किन जगहों पर अलग नियम होगा?

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत के बजाय ₹5 का फ्लैट एमडीआर तय किया गया है।

वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कैपिटल मार्केट लेन-देन के लिए एमडीआर 0.02 प्रतिशत होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

इस तरह यूपीआई पर विवाद का केंद्र ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने का नहीं, बल्कि कुछ बड़े मर्चेंट लेन-देन पर लागू होने वाले एमडीआर का है। कांग्रेस ने इसके संभावित असर पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यूपीआई ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए नया ढांचा बनाया गया है।

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