विरार–अलीबाग मल्टी-कॉरिडोर पर मुआवजे को लेकर विवाद
महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) ने विरार–अलीबाग मल्टी-कॉरिडोर परियोजना के लिए अपनी जमीन के अधिग्रहण के बदले महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) से ₹50 करोड़ मुआवजे की मांग की है। इस संबंध में MSRDC को औपचारिक पत्र भेजा गया है।
🏘️ 16 हजार घरों की बड़ी आवासीय परियोजना प्रभावित
MHADA कल्याण तहसील के शिरढोण क्षेत्र में लगभग 16,000 घरों का एक बड़ा आवासीय प्रोजेक्ट विकसित कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य—
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
- निम्न आय वर्ग (LIG)
- मध्यम आय वर्ग (MIG)
के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराना है।
अब तक इस परियोजना के तहत करीब 10,000 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है।
🛣️ आवासीय परियोजना के बीच से गुजरेगा कॉरिडोर
MSRDC द्वारा विकसित किया जा रहा विरार–अलीबाग मल्टी-कॉरिडोर इसी आवासीय परियोजना के मध्य से होकर गुजरने वाला है। वर्तमान में इस कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
MHADA के अनुसार—
- लगभग 5 हेक्टेयर जमीन प्रभावित होगी
- जमीन की लंबाई करीब 500 मीटर और चौड़ाई 100 मीटर
- परियोजना दो हिस्सों में बंटने का खतरा
💰 क्यों मांगा गया ₹50 करोड़ मुआवजा?
चूंकि मल्टी-कॉरिडोर का अलाइनमेंट पहले ही तय हो चुका है, इसलिए MHADA ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि—
“जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना जरूरी है, ताकि आवासीय परियोजना पर किसी तरह का वित्तीय दबाव न पड़े।”
🔁 आवासीय परिसर के पास प्रस्तावित इंटरचेंज
परियोजना के तहत शिरढोण स्थित MHADA आवासीय परिसर के नजदीक एक इंटरचेंज प्रस्तावित है।
इससे होने वाले फायदे:
- स्थानीय निवासियों को सीधी कनेक्टिविटी
- यात्रा समय में कमी
- क्षेत्र के मूल्य और उपयोगिता में वृद्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आवासीय परियोजना की मांग और रियल एस्टेट वैल्यू दोनों बढ़ेंगी।

