सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर हाल के दिनों में काफी चर्चा हुई। इसी बीच 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया, जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। अब उनकी तकनीकी प्रतिभा को पहचान मिली है और उन्हें IIT कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब C3iHub में ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है।
CBSE पोर्टल की कमियां उजागर कर बने चर्चा का केंद्र
CBSE के OSM सिस्टम को लेकर उठे विवादों के दौरान निसर्ग अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पोर्टल में मौजूद संभावित सुरक्षा और तकनीकी खामियों को उजागर किया था। उनकी इस पहल ने शिक्षा और तकनीकी जगत में व्यापक चर्चा को जन्म दिया। निसर्ग के पोस्ट ने न केवल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए बल्कि साइबर सुरक्षा के महत्व को भी सामने लाया।
IIT कानपुर के निदेशक ने खुद किया संपर्क
IIT कानपुर के निदेशक Manindra Agrawal ने बताया कि 22 मई को निसर्ग का पोस्ट पढ़ने के बाद उन्होंने उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा कि निसर्ग अधिकारी को संस्थान की साइबर सुरक्षा टीम में इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है।
निदेशक के अनुसार, निसर्ग IIT कानपुर द्वारा नियुक्त सबसे कम उम्र के इंजीनियरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान पहले भी अपनी साइबर सुरक्षा टीम के लिए युवा प्रतिभाओं को अवसर देता रहा है और निसर्ग की तकनीकी समझ ने उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाया।
IIT कानपुर में क्या होगा निसर्ग का काम?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निसर्ग अधिकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित और विश्लेषित करेंगे। इसके साथ ही वे वेबसाइट्स और एप्लिकेशन में मौजूद संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान करेंगे, जिससे साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और कमजोरियों को समय रहते दूर करने में मदद मिलेगी।
उन्हें IIT कानपुर की साइबर सिक्योरिटी टीम के तहत कॉन्ट्रैक्ट आधार पर इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है। हालांकि उनकी सैलरी और अनुबंध से जुड़ी अन्य शर्तों का खुलासा नहीं किया गया है।
पहली बार निभाएंगे साइबर सिक्योरिटी की पेशेवर भूमिका
अपनी नियुक्ति पर खुशी जाहिर करते हुए निसर्ग ने कहा कि यह उनके लिए बेहद उत्साहजनक अवसर है क्योंकि पहली बार वे पेशेवर रूप से साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी भूमिका में काम करेंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया है, जबकि साइबर सिक्योरिटी उनके लिए एक शौक और व्यक्तिगत रुचि का क्षेत्र था। IIT कानपुर में यह अवसर उन्हें अपने जुनून को पेशे में बदलने का मौका देगा।
6-7 साल की उम्र से शुरू की थी कोडिंग
निसर्ग अधिकारी की तकनीकी यात्रा बेहद कम उम्र में शुरू हो गई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने 6-7 साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था। बाद में छठी कक्षा के दौरान उनकी रुचि साइबर सिक्योरिटी की ओर बढ़ी और उन्होंने ‘कैप्चर द फ्लैग’ (CTF) जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
इन प्रतियोगिताओं ने उनकी तकनीकी समझ को निखारने और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में गहरी रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार का साइबर सिक्योरिटी से नहीं है कोई संबंध
दिलचस्प बात यह है कि निसर्ग के परिवार में कोई भी साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र से जुड़ा नहीं है। उनके माता-पिता दोनों वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, जिज्ञासा और तकनीकी कौशल के दम पर इतनी कम उम्र में एक प्रतिष्ठित संस्थान में जगह बनाई है।
युवा टेक प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बने निसर्ग
निसर्ग अधिकारी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि तकनीक के प्रति जुनून और निरंतर सीखने की इच्छा कम उम्र में भी बड़े अवसरों के द्वार खोल सकती है। CBSE पोर्टल की खामियां उजागर करने से लेकर IIT कानपुर की साइबर सुरक्षा टीम तक का उनका सफर देश के युवा टेक उत्साहियों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।

