PwC की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, मशीन लर्निंग और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसी स्किल्स की मांग में 69% उछाल
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक नौकरी बाजार को तेजी से बदल रहा है। वर्ष 2025 में एआई स्किल्स की मांग वाली नौकरियों में कुल जॉब मार्केट की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, इन नौकरियों में वेतन वृद्धि की रफ्तार भी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कहीं अधिक रही है।
दुनिया की अग्रणी प्रोफेशनल सर्विसेज और कंसल्टिंग फर्म PwC की ‘AI Jobs Barometer 2026’ रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई का उपयोग उन पेशों में सबसे अधिक अवसर पैदा कर रहा है, जहां इंसानी रचनात्मकता, निर्णय लेने की क्षमता और विशेषज्ञता को तकनीक के जरिए और मजबूत बनाया जा सकता है।
रेडियोलॉजिस्ट और रिक्रूटर जैसी भूमिकाओं में बढ़ी मांग
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेडियोलॉजिस्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और रिक्रूटर जैसे पेशों में नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में एआई इंसानी क्षमताओं को प्रतिस्थापित नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें और अधिक प्रभावी बना रहा है।
इसके विपरीत, आईटी सर्विस मैनेजर और मेडिकल सेक्रेटरी जैसी भूमिकाओं में नौकरी वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों में एआई कई कार्यों को गैर-विशेषज्ञों के लिए भी आसान बना रहा है।
एआई बदल रहा है वैश्विक श्रम बाजार की दिशा
PwC की रिपोर्ट के अनुसार, एआई वैश्विक श्रम बाजार को दो अलग-अलग दिशाओं में प्रभावित कर रहा है। वे कंपनियां अधिक लाभ में हैं जो एआई का इस्तेमाल कर्मचारियों की विशेषज्ञता बढ़ाने, नवाचार को गति देने और उत्पादकता सुधारने के लिए कर रही हैं।
PwC के ग्लोबल चीफ एआई ऑफिसर जो एटकिंसन ने कहा कि जिन संगठनों ने एआई को मानव विशेषज्ञता को मजबूत करने के उपकरण के रूप में अपनाया है, वे प्रतिस्पर्धा में आगे निकल रहे हैं। वहीं केवल लागत कम करने के उद्देश्य से एआई अपनाने वाली कंपनियां अपेक्षित लाभ हासिल नहीं कर पा रही हैं।
एआई इनोवेशन में बेंगलुरु एशिया में दूसरे स्थान पर
ग्लोबल स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट 2026 के अनुसार, बेंगलुरु एआई इनोवेशन के मामले में एशिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। शहर ने प्रदर्शन और शोध के आधार पर दुनिया के शीर्ष 10 एआई इकोसिस्टम में भी जगह बनाई है।
दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम इंडेक्स में 15वें स्थान पर मौजूद बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप हब के रूप में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु का कुल स्टार्टअप इकोसिस्टम मूल्य 152.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है।
मशीन लर्निंग और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग स्किल्स की मांग में 69% उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, मशीन लर्निंग, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और अन्य विशेष एआई स्किल्स से जुड़ी नौकरियों की मांग में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर रही हैं जो एआई टूल्स का प्रभावी उपयोग कर सकें और व्यवसायिक समस्याओं का समाधान निकाल सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई स्किल्स लगभग हर उद्योग के लिए आवश्यक बन सकती हैं।
जूनियर लेवल नौकरियों पर पड़ सकता है असर
PwC के एक अन्य सर्वे के मुताबिक, 49 प्रतिशत सीईओ का मानना है कि अगले तीन वर्षों में एआई के बढ़ते उपयोग के कारण जूनियर लेवल पर भर्ती में कमी आ सकती है। इसके विपरीत, केवल 12 प्रतिशत सीईओ का मानना है कि इसका प्रभाव सीनियर लेवल की नौकरियों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन कंपनियों ने एआई का सबसे अधिक उपयोग किया, वहां 2018 की तुलना में रोजगार में 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
27 देशों के एक अरब से अधिक जॉब पोस्टिंग डेटा का अध्ययन
PwC की इस व्यापक रिपोर्ट में भारत सहित 27 देशों और क्षेत्रों की एक अरब से अधिक जॉब पोस्टिंग का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में श्रम बाजार, वित्तीय प्रदर्शन और पेशेवर डेटा को मिलाकर यह अध्ययन किया गया कि एआई किस तरह नौकरियों, कौशल आवश्यकताओं और वेतन संरचना को प्रभावित कर रहा है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि भविष्य का रोजगार बाजार एआई-सक्षम कौशलों पर आधारित होगा और जो पेशेवर समय रहते नई तकनीकों को अपनाएंगे, उनके लिए अवसरों की कमी नहीं होगी।

