अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे बने हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बेस प्राइस करीब 55 रुपये प्रति लीटर है, तो उपभोक्ताओं को 100 से 115 रुपये तक क्यों चुकाने पड़ रहे हैं। आइए समझते हैं पूरी गणित।
आंध्र प्रदेश में सबसे महंगा पेट्रोल
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पेट्रोल 118.34 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। वहीं हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत 115.69 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। देश के अधिकांश राज्यों में भी पेट्रोल 102 से 110 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा है।
कच्चा तेल सस्ता, फिर भी क्यों नहीं घट रहीं कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल है। इस दर पर आयात किए गए कच्चे तेल की रिफाइनिंग, परिवहन और अन्य शुरुआती लागत जोड़ने के बाद पेट्रोल की बेस प्राइस लगभग 52 से 55 रुपये प्रति लीटर बैठती है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल की कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और अन्य शुल्क हैं।
एक लीटर पेट्रोल की कीमत कैसे बढ़ती है?
एक लीटर पेट्रोल की अनुमानित लागत का गणित इस प्रकार है:
- बेस प्राइस (कच्चा तेल, रिफाइनिंग और परिवहन): 52-55 रुपये प्रति लीटर
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: 20-22 रुपये प्रति लीटर
- राज्य सरकार का वैट (VAT): 15-18 रुपये प्रति लीटर
- डीलर कमीशन: लगभग 4 रुपये प्रति लीटर
इन सभी मदों को जोड़ने के बाद खुदरा कीमत 100 रुपये से लेकर 115 रुपये प्रति लीटर या उससे अधिक तक पहुंच जाती है।
पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के टलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ऐसे में देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि अगले दो से तीन महीने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नीचे बनी रहती हैं, तो घरेलू ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
चार साल में कितना बढ़ा पेट्रोल?
मंत्री के अनुसार, जून 2022 में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि जून 2026 में यह बढ़कर 100.20 रुपये प्रति लीटर हुई। यानी चार वर्षों में पेट्रोल की कीमत में लगभग 5.58 प्रतिशत और डीजल में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और मार्च 2026 में एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने का प्रयास किया है।
दुनिया के कई देशों में भारत से ज्यादा बढ़ीं कीमतें
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, हालिया वैश्विक संकट के दौरान कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारत की तुलना में कहीं अधिक वृद्धि हुई। उनके अनुसार:
- फ्रांस: 17.74%
- जर्मनी: 19.05%
- इटली: 18.39%
- पाकिस्तान: 39.77%
- श्रीलंका: 36.66%
- नेपाल: 20.30%
- बांग्लादेश: 42.69%
सरकार का कहना है कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही है।

