क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंचा, निजी कंपनी ने घटाए ईंधन के दाम; सरकारी पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कटौती को लेकर बढ़ी उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीद तेज हो गई है। वेस्ट एशिया में युद्ध के दौरान 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने वाला क्रूड ऑयल अब 40 फीसदी से अधिक सस्ता हो चुका है। इसी बीच भारत की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेलर नयारा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर दी है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने में अभी कुछ सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है।
नयारा एनर्जी ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम
1 जुलाई से नयारा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। कंपनी ने वेस्ट एशिया संकट के दौरान की गई मूल्य वृद्धि को वापस ले लिया है।
हालांकि, देश के 90 फीसदी से अधिक पेट्रोल पंप संचालित करने वाली सरकारी कंपनियां इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने फिलहाल अपने खुदरा ईंधन दामों में कोई बदलाव नहीं किया है।
जुलाई के आखिर या अगस्त की शुरुआत में मिल सकती है राहत
ऊर्जा और भू-राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में संघर्ष दोबारा नहीं बढ़ता, तो जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल कंपनियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं जिसकी खरीद कीमतें ऊंची होने के दौरान की गई थी। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में कीमतें घटने का असर खुदरा ईंधन कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता।
LPG और ATF की कीमतों में मिली राहत
1 जुलाई से तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में करीब 173 से 184 रुपये तक की कटौती की है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत भी करीब 5 रुपये प्रति लीटर कम की गई है।
हालांकि, 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
क्यों तुरंत नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल की कीमत पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स, डीलर कमीशन और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत भी शामिल होती है।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने के बावजूद उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पहुंचने में आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह का समय लग जाता है।
70 डॉलर से नीचे क्रूड भारत के लिए क्यों है फायदेमंद?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती है तो भारत का आयात बिल घटेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और रुपये को मजबूती मिल सकती है। साथ ही परिवहन लागत कम होने से महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल बाजार में स्थिरता का इंतजार कर रही हैं ताकि ईंधन कीमतों में कटौती का फैसला लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो सके।

