अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून मौद्रिक नीति बैठक (Fed Minutes) जारी होने से पहले भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक फेड की ब्याज दरों पर अगली रणनीति को लेकर सतर्क हैं, जिसके चलते कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। इसके साथ ही कमजोर अमेरिकी पेरोल डेटा और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
MCX पर सोने का ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स 0.52 फीसदी यानी 767 रुपये की गिरावट के साथ 1,46,148 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल सोने के लिए 1,46,100 रुपये और 1,45,500 रुपये का महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर बना हुआ है। यदि यह स्तर टूटता है तो कीमतों में आगे भी कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।
चांदी में भी आई तेज गिरावट
सोने के साथ-साथ सितंबर सिल्वर फ्यूचर्स में भी 1.14 फीसदी यानी 2,859 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद MCX पर चांदी का भाव 2,33,416 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार चांदी के लिए 2,33,300 रुपये और 2,30,000 रुपये मजबूत सपोर्ट लेवल हैं, जबकि 2,38,800 रुपये और 2,41,000 रुपये पर प्रमुख रेजिस्टेंस बना हुआ है।
क्यों गिरे सोने और चांदी के दाम?
बाजार जानकारों के अनुसार गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के जून बैठक के मिनट्स का इंतजार।
- ब्याज दरों की भविष्य की दिशा को लेकर अनिश्चितता।
- जून के अमेरिकी पेरोल आंकड़ों का अपेक्षा से कमजोर रहना।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी घटनाएं।
- निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश (Safe Haven) में नई रणनीति अपनाना।
बड़े शहरों में भी दिखेगा असर
MCX में आई गिरावट का असर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में भी देखने को मिल सकता है। आमतौर पर वायदा बाजार में कीमतों में बदलाव का प्रभाव स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है, जिससे खुदरा ग्राहकों के लिए सोना-चांदी की कीमतों में बदलाव संभव है।
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के कमोडिटी विशेषज्ञ रवि सिंह के अनुसार, तकनीकी रूप से सोने का ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। यदि कीमतें 1,48,000 रुपये के स्तर को पार करती हैं, तो सोना 1,50,000 से 1,51,000 रुपये के दायरे तक पहुंच सकता है।
वहीं, पृथ्वीफिनमार्ट के मनोज कुमार जैन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को 4,135 डॉलर और 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। उनका मानना है कि फेड मिनट्स जारी होने के बाद ही सोने और चांदी की अगली बड़ी चाल स्पष्ट होगी।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को फेडरल रिजर्व के संकेतों का इंतजार करना चाहिए। ब्याज दरों पर आने वाले फैसले और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां ही आगे सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

