नई दिल्ली: भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देने की तैयारी में है। इस पहल का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण की पूरी सप्लाई चेन विकसित करना है, ताकि मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स का बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन हो सके।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की करीब 75 प्रतिशत सेमीकंडक्टर जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करना है। इस महत्वाकांक्षी मिशन से देश में निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही शेयर बाजार की कुछ कंपनियों के लिए भी यह बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
Kaynes Technology पर निवेशकों की नजर
सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से उभर रही Kaynes Technology इस मिशन की सबसे बड़ी संभावित लाभार्थी कंपनियों में मानी जा रही है। कंपनी गुजरात में OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) सुविधा विकसित कर रही है, जहां चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग का काम किया जाएगा।
यदि सरकार इस सेक्टर के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन और निवेश योजनाएं लागू करती है, तो Kaynes Technology को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालिया कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर करीब 5.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,333 रुपये पर बंद हुआ। पिछले पांच वर्षों में इस शेयर ने निवेशकों को लगभग 328 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
CG Power भी सेमीकंडक्टर कारोबार में मजबूत दावेदार
CG Power and Industrial Solutions भी अब पारंपरिक बिजली उपकरणों के कारोबार से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है। सरकार ने कंपनी को OSAT परियोजना के लिए मंजूरी दी है, जिसके बाद कंपनी चिप पैकेजिंग कारोबार में प्रवेश कर चुकी है।
हालांकि हालिया बाजार में बिकवाली के चलते कंपनी का शेयर करीब 6.97 प्रतिशत गिरकर 892 रुपये पर बंद हुआ, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में यह निवेशकों के लिए मजबूत ग्रोथ स्टोरी बन सकता है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी के शेयर ने 1,000 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है।
क्यों अहम है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन?
आज के समय में लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग होता है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण, रक्षा प्रणाली और औद्योगिक मशीनों तक, हर क्षेत्र में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक चिप संकट ने यह दिखा दिया था कि सेमीकंडक्टर सप्लाई बाधित होने से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए भारत सरकार घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और टेस्टिंग का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना चाहती है।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा मिलने से देश में हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा और आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

