विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने जून 2026 के दूसरे पखवाड़े में भारतीय शेयर बाजार के बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में दमदार वापसी की है। महीने के पहले 15 दिनों में भारी बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों ने 16 से 30 जून के बीच फाइनेंशियल सेक्टर में 14,634 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह वर्ष 2026 में इस सेक्टर में उनकी सबसे बड़ी दो सप्ताह की खरीदारी है।
जून के दूसरे पखवाड़े में बदला निवेशकों का रुख
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, जून के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने फाइनेंशियल सेक्टर से 11,263 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, 16 से 30 जून के बीच उन्होंने 14,634 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे पूरे महीने में इस सेक्टर में 3,371 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) दर्ज हुआ।
इसके साथ ही विदेशी निवेशक 16-30 जून के दौरान भारतीय शेयर बाजार में कुल 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के नेट खरीदार बन गए। इससे पहले जून के पहले हिस्से में 63,450 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई थी।
FTSE रीबैलेंसिंग और वैल्यू बाइंग से मिला सहारा
IIFL कैपिटल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीराम वेलयुधन के अनुसार, लगातार तीन महीनों तक रिकॉर्ड निकासी के बाद विदेशी निवेशक दोबारा बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदार बने हैं। उनका कहना है कि इस निवेश का एक हिस्सा FTSE जून 2026 इंडेक्स रीबैलेंसिंग से आया, जबकि बाकी निवेश आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए एक्टिव खरीदारी के रूप में हुआ।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष विदेशी निवेशकों ने सबसे अधिक बिकवाली भी फाइनेंशियल सेक्टर में ही की थी, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार में इस सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है और ‘रिस्क-ऑफ’ माहौल का सबसे अधिक असर इसी पर पड़ा था।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से सुधरा निवेशकों का भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि जून के मध्य में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर फिर बढ़ा है। इसका फायदा बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे बड़े और लिक्विड सेक्टरों को मिला है।
ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता के मुताबिक, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर भारतीय शेयर बाजार का करीब 40% हिस्सा है। ऐसे में जब वैल्यूएशन आकर्षक होते हैं और ग्रोथ की संभावना मजबूत रहती है, तो विदेशी निवेशकों का रुख स्वाभाविक रूप से इस सेक्टर की ओर होता है। उनका मानना है कि यह सेक्टर आगे भी लॉन्ग टर्म निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की पहली पसंद बना रह सकता है।
जून 2026 में किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा निवेश हुआ?
| सेक्टर | 16-30 जून (₹ करोड़) | 1-15 जून (₹ करोड़) | जून 2026 कुल (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|
| फाइनेंशियल सर्विसेज | 14,634 | -11,263 | 3,371 |
| कंस्ट्रक्शन | 3,484 | -603 | 2,881 |
| सर्विसेज | 2,592 | 302 | 2,894 |
| कंज्यूमर ड्यूरेबल्स | 2,564 | -634 | 1,930 |
| अन्य | 863 | 629 | 1,492 |
इन सेक्टरों से जारी रही बिकवाली
फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के बावजूद कुछ सेक्टरों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही। जून में केमिकल्स, टेलीकम्युनिकेशन, मीडिया, एंटरटेनमेंट और फॉरेस्ट मटीरियल्स सेक्टर में नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी रहती है, तो विदेशी निवेशकों की बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी आगे भी जारी रह सकती है। आकर्षक वैल्यूएशन, मजबूत बैलेंस शीट और उच्च लिक्विडिटी इस सेक्टर को निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनाए हुए हैं.

