टी20 सीरीज में शॉर्ट ऑफ लेंग्थ गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को किया था परेशान, अब वनडे में रोहित-विराट और गिल की तकनीक होगी इंग्लैंड की असली परीक्षा
भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज शुरू होने से पहले सबसे बड़ी चर्चा इंग्लैंड की उसी रणनीति को लेकर है, जिसने टी20 सीरीज में टीम इंडिया को मुश्किल में डाल दिया था। टी20 सीरीज में इंग्लिश गेंदबाजों ने लगातार शॉर्ट ऑफ लेंग्थ (करीब 9 मीटर) गेंदबाजी कर भारतीय बल्लेबाजों को जमकर परेशान किया था। यही रणनीति भारत की 0-4 की शर्मनाक हार की बड़ी वजहों में से एक रही। अब सवाल यह है कि क्या इंग्लैंड वनडे सीरीज में भी उसी ‘9 मीटर वाले चक्रव्यूह’ का इस्तेमाल करेगा।
टी20 सीरीज के दौरान इंग्लैंड के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार शॉर्ट पिच गेंदों का सहारा लिया। आमतौर पर ऐसी गेंदें 7 से 10 मीटर की लेंग्थ पर पिच होती हैं, जिससे बल्लेबाजों के लिए पुल और हुक शॉट खेलना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
टी20 सीरीज में शॉर्ट बॉल बनी भारत की सबसे बड़ी कमजोरी
साउथैम्प्टन में खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले से पहले तक इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 118 शॉर्ट पिच गेंदें फेंकी थीं, जिन पर भारतीय बल्लेबाजों ने 11 विकेट गंवाए। इन गेंदों पर भारत ने 171 रन बनाए, लेकिन औसत सिर्फ 15.54 रहा। पांचवें टी20 में भी अभिषेक शर्मा, शिवम दुबे और सूर्यांश शेडगे शॉर्ट ऑफ लेंग्थ गेंदों का शिकार बने। पूरी टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाज 14 बार इस रणनीति के जाल में फंसे।
वैभव सूर्यवंशी की कमजोरी भी आई सामने
टी20 सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की शॉर्ट गेंदों के खिलाफ कमजोरी भी उजागर हुई। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने उन्हें तीन में से दो मैचों में शॉर्ट गेंद पर आउट किया। इससे साफ हो गया कि इंग्लैंड ने भारतीय बल्लेबाजों की तकनीकी कमजोरियों पर खास तैयारी की थी।
वनडे में बदल जाएगी तस्वीर?
हालांकि वनडे सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी क्रम टी20 से अलग होगा। टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे अनुभवी बल्लेबाज मौजूद हैं, जो शॉर्ट पिच गेंदों को खेलने में कहीं अधिक सक्षम माने जाते हैं। ऐसे में यदि इंग्लैंड एक बार फिर शॉर्ट ऑफ लेंग्थ गेंदबाजी की रणनीति अपनाता है, तो भारतीय बल्लेबाज उसके खिलाफ बेहतर जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजों को पारी बनाने के लिए अधिक समय मिलता है, जिससे वे परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकते हैं। यही कारण है कि इंग्लैंड की सफल टी20 रणनीति वनडे में उतनी कारगर होगी या नहीं, इसका जवाब मैदान पर ही मिलेगा।

