महाराष्ट्र सरकार ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आदेश दिया है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
इस फैसले से संबंधित छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। शासनादेश के अनुसार, ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए पहले तय की गई 31 जुलाई 2026 की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।
इसमें राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े वे मामले भी शामिल हैं, जिनमें इस अवधि तक चार्जशीट दाखिल की जानी है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के अलावा देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
मुंबई सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया था।
मुंबई में दर्ज हुई थीं 16 एफआईआर
मुंबई शहर में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस ने अवैध जमावड़े और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में 16 एफआईआर दर्ज की थीं। पुलिस जांच पूरी करने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल करती है। इसके बाद ही सरकार दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।
अगर चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो पुलिस द्वारा अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद भी केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
मनीषा म्हैस्कर को कार्रवाई शुरू करने के निर्देश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा म्हैस्कर को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।
सरकार के इस फैसले से नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों को बड़ी कानूनी राहत मिलने की उम्मीद है।

