बिहार में अब सरकारी स्कूल भी लिए जा सकेंगे गोद, 73 हजार से ज्यादा स्कूल योजना में शामिल

Thecity news
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बिहार सरकार ने हाल ही में 551 मॉडल स्कूलों की शुरुआत की है, जहां स्मार्ट क्लास, ई-लाइब्रेरी और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच सरकार ने सरकारी स्कूलों को गोद देने की भी व्यवस्था शुरू की है। बिहार स्कूल परीक्षा समिति ने इसके लिए ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ नाम से डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। इसके जरिए राज्य के सरकारी स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में सहयोग किया जा सकेगा।

कौन ले सकता है सरकारी स्कूलों को गोद

बिहार स्कूल परीक्षा समिति ने सरकारी स्कूलों को गोद लेने के लिए ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ डिजिटल पोर्टल शुरू किया है। इसके माध्यम से पूर्व छात्र, आम नागरिक, गैर-सरकारी संगठन, संगठन, कॉरपोरेट और प्रवासी भारतीय सरकारी स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में सहयोग कर सकेंगे।

आजीवन गोद लेने की सुविधा

सरकारी स्कूलों को गोद लेने के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। इसके तहत सिर्फ तीन साल के लिए स्कूल गोद लेने की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अब कोई व्यक्ति या संस्था 3 साल, 5 साल या आजीवन किसी सरकारी स्कूल को गोद ले सकेगी।

राज्य के 73 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल इस योजना के तहत गोद लिए जा सकेंगे।

फैसले पर विपक्ष ने उठाए सवाल

सरकारी स्कूलों को गोद देने की योजना को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। भाजपा ने जहां इस योजना की सराहना की है, वहीं राजद का कहना है कि इसके जरिए बिहार के सरकारी विद्यालयों और उनके भवनों को निजी हाथों में सौंपने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।

सरकार का तर्क है कि स्कूलों को गोद लेने से उनका विकास होगा, संसाधन बढ़ेंगे और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि विपक्षी दल योजना में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि स्कूल गोद लेने के बाद उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, खर्च कौन उठाएगा, गोद लेने वाले व्यक्ति या संस्था की स्कूल के फैसलों में कितनी भूमिका होगी और सरकारी स्कूलों की मूल व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा।

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