तृषा जॉली-गायत्री गोपीचंद ने रचा इतिहास, 15 साल बाद वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत का महिला डबल्स मेडल पक्का

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चीनी जोड़ी को 16-21, 21-15, 21-13 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचीं तृषा और गायत्री, चोट के बाद तृषा की शानदार वापसी

भारतीय बैडमिंटन के लिए वर्ल्ड चैम्पियनशिप से बड़ी खुशखबरी आई है। तृषा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन की जिया यी फान और झांग शू शियान को हराकर महिला डबल्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। नई दिल्ली में खेले गए क्वार्टरफाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने 16-21, 21-15, 21-13 से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारत का महिला डबल्स में 15 साल बाद वर्ल्ड चैम्पियनशिप मेडल पक्का हो गया है।

मुकाबला 1 घंटे 9 मिनट तक चला। भारतीय जोड़ी को पहले गेम में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद तृषा और गायत्री ने शानदार वापसी करते हुए लगातार दो गेम अपने नाम कर लिए। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही भारतीय जोड़ी ने कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया है।

15 साल बाद महिला डबल्स में भारत को मिलेगा मेडल

भारत को महिला डबल्स में वर्ल्ड चैम्पियनशिप का पिछला पदक 2011 में मिला था। तब ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने लंदन में कांस्य पदक जीता था। अब 15 साल बाद तृषा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने एक बार फिर भारतीय महिला डबल्स को वर्ल्ड चैम्पियनशिप में पदक दिलाने की उपलब्धि हासिल की है।

चीन के खिलाफ था 0-3 का रिकॉर्ड

क्वार्टरफाइनल से पहले तृषा और गायत्री का चीनी जोड़ी के खिलाफ रिकॉर्ड उनके पक्ष में नहीं था। दोनों भारतीय खिलाड़ी जिया यी फान और झांग शू शियान के खिलाफ अपने तीनों मुकाबले हार चुकी थीं। यानी दोनों जोड़ियों के बीच हेड-टु-हेड रिकॉर्ड 0-3 था।

पहले गेम में भी भारतीय जोड़ी की शुरुआत खराब रही। तृषा और गायत्री एक समय 1-6 से पीछे चल रही थीं। इसके बाद दोनों ने लगातार छह अंक हासिल कर स्कोर 8-9 तक पहुंचा दिया। हालांकि चीनी जोड़ी ने इंटरवल तक बढ़त बनाए रखी और आखिरकार पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया।

दूसरे गेम में पलट दिया पूरा मुकाबला

दूसरे गेम में भी चीनी खिलाड़ियों ने शुरुआत में दबाव बनाया और एक समय 5-1 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद स्कोर 10-7 तक पहुंचा, लेकिन तृषा और गायत्री ने शानदार वापसी की।

भारतीय जोड़ी ने लगातार अंक जुटाते हुए 13-10 की बढ़त बना ली। इसके बाद मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया और स्कोर 15-14 तक पहुंच गया। यहां से तृषा और गायत्री ने आक्रामक खेल दिखाया और लगातार अंक हासिल करते हुए 19-14 की बढ़त बना ली। आखिरकार भारतीय जोड़ी ने दूसरा गेम 21-15 से जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।

निर्णायक गेम में भारतीय जोड़ी का दबदबा

तीसरे और निर्णायक गेम में तृषा और गायत्री ने शुरुआत से ही चीनी जोड़ी पर दबाव बनाए रखा। भारतीय खिलाड़ियों ने जल्द ही 11-5 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद लगातार तीन अंक लेकर स्कोर 14-7 कर दिया।

चीनी खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ता गया और उनसे लगातार गलतियां होने लगीं। तृषा और गायत्री ने इसका पूरा फायदा उठाया और 17-9 की बड़ी बढ़त हासिल कर ली। भारतीय जोड़ी ने अपना संयम बनाए रखा और आखिरकार तीसरा गेम 21-13 से जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली।

हाई-फाइव और फिस्ट पंप से दिखा आत्मविश्वास

मुकाबले के दौरान तृषा और गायत्री की बॉडी लैंग्वेज भी काफी शानदार रही। दोनों खिलाड़ी हर महत्वपूर्ण अंक के बाद एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाती नजर आईं। कई मौकों पर दोनों ने हाई-फाइव और फिस्ट पंप के जरिए अपना आत्मविश्वास जाहिर किया।

गायत्री की तेज फ्लैट रैलियों ने भी चीनी खिलाड़ियों को काफी परेशान किया। दूसरी तरफ जिया यी फान और झांग शू शियान पर दबाव बढ़ता गया और उनकी गलतियां भी बढ़ने लगीं।

9 मैच पॉइंट के बाद मिली ऐतिहासिक जीत

निर्णायक गेम में भारतीय जोड़ी ने बड़ी बढ़त बना ली थी। चीनी जोड़ी के एक और शॉट को नेट में जाने के बाद तृषा और गायत्री को 9 मैच पॉइंट मिले। चीनी खिलाड़ियों ने दो मैच पॉइंट बचाए, लेकिन इसके बाद उनका एक शॉट बाहर चला गया और मुकाबला भारत के नाम हो गया।

जीत पक्की होते ही तृषा जॉली जश्न में कोर्ट पर गिर पड़ीं। वहीं गायत्री गोपीचंद भी कुछ पल के लिए इस ऐतिहासिक जीत पर विश्वास नहीं कर पाईं। यह जीत सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचने की नहीं थी, बल्कि भारतीय महिला डबल्स के 15 साल के इंतजार को खत्म करने वाली उपलब्धि थी।

चोट के बाद तृषा की शानदार वापसी

तृषा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी पहले भी बड़े टूर्नामेंट में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है। दोनों 2022 और 2023 ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा दोनों ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक भी जीता था। पिछले साल की शुरुआत में यह जोड़ी वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-10 तक पहुंच गई थी।

हालांकि, इस साल की शुरुआत में तृषा को चोट के कारण बड़ा झटका लगा था। एशिया बैडमिंटन चैम्पियनशिप और उबर कप से पहले ट्रेनिंग के दौरान उनके टखने में चोट लग गई थी। इसके बाद उन्हें लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा।

वापसी के बाद तृषा और गायत्री ने इंडोनेशिया ओपन और यूएस ओपन में हिस्सा लिया। इसके बाद इस महीने की शुरुआत में फिलीपीन इंटरनेशनल चैलेंज में दोनों ने अपनी लय हासिल करने के संकेत दिए। अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में चीन की मजबूत जोड़ी को हराकर दोनों ने साबित कर दिया है कि तृषा की वापसी पूरी तरह हो चुकी है।

अब भारतीय जोड़ी की नजर सेमीफाइनल पर है। कांस्य पदक पक्का करने के बाद तृषा जॉली और गायत्री गोपीचंद के पास इतिहास रचने का मौका है। देखना होगा कि दोनों खिलाड़ी इस शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए भारत के लिए रजत या स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब होती हैं या नहीं।

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