बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली 1981 में 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान, जबकि भर्ती विज्ञापन में 360 अंकों की लिखित परीक्षा के आधार पर चयन की बात; आयोग ने प्रक्रिया को नियमसंगत बताया
उत्तर प्रदेश के नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया में नियमावली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में अभी भी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और प्रशिक्षण के अंकों को शैक्षिक मेरिट में शामिल करने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी भर्ती विज्ञापन में चयन का आधार केवल लिखित परीक्षा की मेरिट को बनाया गया है।
भर्ती विज्ञापन के अनुसार चयन 360 अंकों की लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। विज्ञापन में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और प्रशिक्षण के अंकों को चयन की मेरिट में शामिल नहीं किया गया है। समान अंक होने की स्थिति में स्नातक, प्रशिक्षण प्रतिशत और उम्र को आधार बनाए जाने की बात कही गई है।
नियमावली में 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान
बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और डीएलएड यानी बीटीसी या प्रशिक्षण के अंकों को गुणवत्ता बिंदुओं के रूप में शामिल किया जाता है। इन चारों के लिए 10-10 प्रतिशत यानी कुल 40 प्रतिशत भारांक निर्धारित होने की बात कही गई है।
इसके अलावा सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अंकों को 60 प्रतिशत भारांक दिया जाता है। ऐसे में भर्ती विज्ञापन में पूरी मेरिट को लिखित परीक्षा के आधार पर निर्धारित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि सहायक शिक्षक भर्ती का चयन पूरी तरह लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाना है तो पहले सेवा नियमावली में संशोधन किया जाना जरूरी है। उनके मुताबिक, सरकार को कैबिनेट के जरिए नियमावली में 26वां संशोधन कर शैक्षिक मेरिट के प्रावधान को समाप्त करना चाहिए था। हालांकि, यह एक कानूनी और प्रशासनिक आपत्ति के रूप में सामने आया है और भर्ती प्रक्रिया की वैधता का अंतिम निर्धारण संबंधित प्राधिकारी या न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
2017 से 2019 के बीच हुए छह संशोधन
बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में वर्ष 2017 से 2019 के बीच 20वें से 25वें संशोधन किए गए थे। इन संशोधनों में एटीआरई परीक्षा, बीएड की योग्यता और नियमावली के अपेंडिक्स सहित कई प्रावधानों में बदलाव किए गए, लेकिन शैक्षिक मेरिट से जुड़ा प्रावधान कायम रहा।
इसी शैक्षिक मेरिट के आधार पर पहले 68,500 और 69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। इसी वजह से अब 11,508 पदों की नई भर्ती में चयन प्रक्रिया को लेकर नियमावली और विज्ञापन के बीच सामंजस्य का मुद्दा उठाया जा रहा है।
आयोग ने भर्ती विज्ञापन को बताया नियमसंगत
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के पीआरओ डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि चयन प्रक्रिया तय करने का अधिकार परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था यानी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के पास है। उनके अनुसार 11,508 सहायक अध्यापक भर्ती का जारी किया गया विज्ञापन नियमसंगत है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठी आपत्तियों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा सेवा नियमावली के प्रावधान और लिखित परीक्षा आधारित चयन प्रक्रिया के बीच कानूनी स्थिति किस तरह स्पष्ट होती है।

