मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के अध्ययन में बड़ा दावा—ChatGPT जैसे चैटबॉट्स आने के बाद लोग खुद AI की तरह बोलने लगे हैं। यूट्यूब कमेंट्स से लेकर रोजमर्रा की बातों तक में ‘कम्प्रिहेंसिव’, ‘मेटिकुलस’ और ‘बोल्स्टर’ जैसे शब्दों का बढ़ा प्रयोग। जानें कैसे AI मानव भाषा पर प्रभाव डाल रहा है।
AI आने के बाद इंसानी बातचीत में आया बड़ा बदलाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), खासकर ChatGPT जैसी तकनीकों के आने के बाद लोगों के बोलने और लिखने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
पहले यह चिंता थी कि AI इंटरनेट को रोबोटिक लेखन से भर देगा, लेकिन अब शोधकर्ताओं का दावा है कि इंसान खुद चैटबॉट्स की तरह बोलने लगे हैं।
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यह बदलाव सिर्फ टाइपिंग या ऑनलाइन चैट तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की बातचीत में भी दिख रहा है।
ChatGPT के बाद भाषा में आया नया पैटर्न
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए अध्ययन में ChatGPT लॉन्च होने के बाद भाषा में आए बदलावों का विश्लेषण किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि—
- यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोग अचानक ऐसे शब्द इस्तेमाल करने लगे, जो पहले उनकी सामान्य बातचीत में नहीं थे।
- जैसे—अंडरस्कोर, कॉम्प्रिहेंसिव, मेटिकुलस, बोल्स्टर
- यह बदलाव ठीक उसी समय दिखाई दिया जब ChatGPT लोकप्रिय हुआ।
इससे संकेत मिलता है कि लोग अनजाने में ही AI की शब्दावली अपना रहे हैं।
क्यों आया इंसानों में AI जैसा लहजा?
Wired से बात करते हुए कई मॉडरेटर्स ने बताया कि—
- आजकल बहुत सारी पोस्ट्स असली लोगों द्वारा लिखी होती हैं, लेकिन पढ़ने में AI-जनरेटेड लगती हैं।
- चूंकि AI मनुष्यों के लेखन से सीखता है और मनुष्य ऑनलाइन जो देखते हैं उसकी नकल करते हैं—इससे दोनों के बीच एक फीडबैक लूप बन जाता है।
- नतीजा यह होता है कि इंसान भी उसी चैटबॉट-स्टाइल टोन में बात करने लगते हैं, जिसे AI आगे फिर से सीख लेता है।
इस चक्र के कारण इंसान और AI के लेखन व बोलने की शैली में फर्क तेजी से कम होता जा रहा है।

