AI की वजह से भारत में 1.5 करोड़ नौकरियों पर संकट! विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी

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टेक कंपनियों में बढ़ती छंटनी को बताया शुरुआती संकेत, व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों पर भी मंडरा रहा खतरा

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों समेत भारतीय कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते हो रही छंटनियों को विशेषज्ञ अब सिर्फ शुरुआत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में इसका असर बड़े पदों और व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर भी साफ दिखाई देगा।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 58 प्रतिशत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पहले से ही एआई के जरिए कर्मचारियों की संख्या कम करने की दिशा में निवेश कर रहे हैं, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक कंपनियां उत्पादन और ऑपरेशनल स्तर पर एआई में भारी निवेश कर रही हैं।

2030 तक 1.8 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने का अनुमान

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने चेतावनी दी है कि एआई तेजी से प्रयोग के दौर से निकलकर अब वास्तविक क्रियान्वयन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में लाखों नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

उन्होंने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सर्विसनाउ (ServiceNow) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2030 तक एआई ऑटोमेशन से भारत में करीब 1.8 करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि इस दौरान केवल लगभग 30 लाख नई टेक्नोलॉजी आधारित नौकरियां पैदा होंगी।

इस तरह करीब 1.5 करोड़ नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उन्हें एआई आधारित नई भूमिकाओं में बदला जाएगा।

‘मौजूदा छंटनी सिर्फ ट्रेलर है’

सौरभ मुखर्जी ने कहा कि टेक सेक्टर में अभी जो छंटनी देखने को मिल रही है, वह केवल शुरुआती झलक है। उनका कहना है कि आने वाले समय में एआई सिस्टम इंसानों के बराबर डिजिटल काम करने में सक्षम हो जाएंगे, जिससे कंपनियां बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन की ओर बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, अल्फाबेट, एप्पल और अन्य बड़ी टेक कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स, डेटा सेंटर और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स पर भारी निवेश कर रही हैं।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 800 बिलियन डॉलर का निवेश

मुखर्जी के अनुसार पिछले 12 महीनों में बड़ी टेक कंपनियों ने एआई पूंजीगत खर्च को लगभग दोगुना कर दिया है। इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से करीब 800 बिलियन डॉलर का निवेश एआई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया है।

उन्होंने कहा कि यह रकम भारत की जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत के बराबर है और यही वह निर्णायक मोड़ है, जहां से एआई का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा।

एंथ्रोपिक का उदाहरण देकर समझाया AI का असर

सौरभ मुखर्जी ने एंथ्रोपिक (Anthropic) का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी के क्लाउड एआई प्लेटफॉर्म से जुड़ा औद्योगिक राजस्व 2025 की शुरुआत में करीब 1 बिलियन डॉलर था, जो सिर्फ 15 महीनों में बढ़कर लगभग 30 बिलियन डॉलर सालाना तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि यही एआई की गति और पैमाने की असली ताकत है।

बिग टेक कंपनियां कर रहीं रिकॉर्ड खर्च

माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियां इस साल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रुपये तक खर्च कर रही हैं। वहीं गार्टनर के अनुसार वैश्विक एआई खर्च बढ़कर 240 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई भविष्य में उद्योगों की कार्यशैली पूरी तरह बदल सकता है, लेकिन इसके साथ रोजगार के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

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