आंध्र प्रदेश के सभी 100 शहरी निकायों में चुनाव प्रक्रिया पर रोक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फैसला

Thecity news
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कानून-व्यवस्था की कथित समस्याओं के कारण नामांकन से वंचित उम्मीदवारों को राहत देने पर आयोग गुरुवार को फैसला करेगा।

आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (एपीएसईसी) ने बुधवार को राज्य के सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। कोर्ट ने आयोग से उन उम्मीदवारों के लिए नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने पर विचार करने को कहा था, जो कानून-व्यवस्था की कथित समस्याओं के कारण अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर पाए थे।

बुधवार देर शाम जारी आधिकारिक आदेश में आयोग ने कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 21 अक्टूबर के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आयोग को चुनाव अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट मिलने के बाद गुरुवार को अगला आदेश जारी करना है।

इन चुनावों में 13 नगर निगमों के अलावा 87 नगरपालिकाएं और नगर पंचायतें शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन की समय-सीमा पर फैसला लेने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को 22 अक्टूबर तक यह तय करने का निर्देश दिया है कि उन शहरी निकायों में नामांकन की समय-सीमा बढ़ाई जाए या नहीं, जहां कानून-व्यवस्था की कथित समस्याओं के कारण उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर पाए थे।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने आयोग से उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करने की प्रक्रिया 26 अक्टूबर तक टालने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और उम्मीदवारों की ओर से सौंपे गए अभ्यावेदनों, सहायक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच करने का भी निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अहम हिस्सा हैं। नामांकन दाखिल करने का अधिकार इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक अदालतें आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करतीं, लेकिन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को असंवैधानिक या अवैध तरीकों से प्रभावित होने से बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर दखल दे सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, यदि आयोग नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला करता है, तो उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने के लिए आदेश जारी होने के बाद कम से कम 48 घंटे का समय देना होगा।

जिला प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला

आयोग के आदेश के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 16 से 18 अक्टूबर तक चली थी, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 19 अक्टूबर को हुई। उम्मीदवारों की अंतिम सूची मूल रूप से 21 अक्टूबर को जारी की जानी थी।

नामांकन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को कथित तौर पर रोके जाने की शिकायतों पर आयोग जिला प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद गुरुवार को आगे का फैसला लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और नामांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी हो।

वाईएसआरसीपी ने हिंसा और डराने-धमकाने का लगाया आरोप

सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की याचिका पर सुनवाई के दौरान आए। पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था।

वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं के कारण पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित कई स्थानों पर उसके उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन के दौरान आंध्र प्रदेश के कई जिलों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला में भी नामांकन केंद्र के पास तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी)-जनसेना और वाईएसआरसीपी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान पुलिस ने हवा में छह राउंड फायरिंग की और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया।

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