Ashok Kumar Career: ‘जीवन नैया’ से रातोंरात स्टार बने अशोक कुमार, जानें उनकी फिल्मी यात्रा

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दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार ने 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से एक्टिंग की शुरुआत की और ‘अछूत कन्या’ से रातोंरात स्टार बने। जानें उनके करियर और पुरस्कारों की पूरी कहानी।

दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार ने हिंदी सिनेमा में सहजता और स्टाइल से अपनी अलग पहचान बनाई। 10 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि पर उनके फिल्मी सफर और करियर की कहानी याद की जा रही है।

अशोक कुमार का असली नाम और शुरुआती जीवन:
अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। बिहार के भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार ने शुरू में वकालत की पढ़ाई की, लेकिन किस्मत ने उन्हें फिल्मों की ओर मोड़ा। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में उनकी दोस्ती शशधर मुखर्जी से हुई, जिसने बाद में उन्हें मुंबई बुलाया।

पहली फिल्म और करियर की शुरुआत:
साल 1936 में बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘जीवन नैया’ में अशोक कुमार को लीड रोल का ऑफर मिला, क्योंकि पहले चुने गए हीरो ने मना कर दिया। इस फिल्म से उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।

रातोंरात स्टार बनने की कहानी:
‘जीवन नैया’ की सफलता के बाद उनकी फिल्म ‘अछूत कन्या’ रिलीज हुई और अशोक कुमार रातोंरात स्टार बन गए। देविका रानी के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को खूब भाया। सहज अभिनय और नैचुरल डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई।

प्रमुख फिल्में और उपलब्धियां:
अशोक कुमार ने ‘किस्मत’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘कंगन’, ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘बंधन’, ‘झूला’, ‘बंदिनी’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1988 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 1962 में पद्म श्री और 1999 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार ने हिंदी सिनेमा में सहजता और स्टाइल से अपनी अलग पहचान बनाई। 10 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि पर उनके फिल्मी सफर और करियर की कहानी याद की जा रही है।

अशोक कुमार का असली नाम और शुरुआती जीवन:
अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। बिहार के भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार ने शुरू में वकालत की पढ़ाई की, लेकिन किस्मत ने उन्हें फिल्मों की ओर मोड़ा। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में उनकी दोस्ती शशधर मुखर्जी से हुई, जिसने बाद में उन्हें मुंबई बुलाया।

पहली फिल्म और करियर की शुरुआत:
साल 1936 में बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘जीवन नैया’ में अशोक कुमार को लीड रोल का ऑफर मिला, क्योंकि पहले चुने गए हीरो ने मना कर दिया। इस फिल्म से उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।

रातोंरात स्टार बनने की कहानी:
‘जीवन नैया’ की सफलता के बाद उनकी फिल्म ‘अछूत कन्या’ रिलीज हुई और अशोक कुमार रातोंरात स्टार बन गए। देविका रानी के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को खूब भाया। सहज अभिनय और नैचुरल डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई।

प्रमुख फिल्में और उपलब्धियां:
अशोक कुमार ने ‘किस्मत’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘कंगन’, ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘बंधन’, ‘झूला’, ‘बंदिनी’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1988 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 1962 में पद्म श्री और 1999 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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