भारत आज फ्रांस और UAE के साथ अरब सागर में त्रिपक्षीय वायु युद्ध अभ्यास करेगा। IAF सुखोई-30, जगुआर और AEW&C विमान तैनात। अभ्यास से हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग मजबूत होगा।
भारत आज फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ अरब सागर के ऊपर बड़ा वायु युद्ध अभ्यास करेगा। इसका उद्देश्य हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में त्रिपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना और सैन्य तालमेल बढ़ाना है।
भारतीय विमान और तैयारी:
भारतीय वायु सेना (IAF) अपने सुखोई-30MKI और जगुआर लड़ाकू विमानों को तैनात करेगी। इसके साथ IL-78 एयर टैंकर और AEW&C विमान भी अभ्यास में शामिल होंगे। सभी विमान गुजरात के जामनगर और नलिया एयरबेस से उड़ान भरेंगे।
फ्रांस और UAE का योगदान:
फ्रांस और UAE की ओर से अल धफरा एयरबेस से राफेल और मिराज लड़ाकू विमान तथा अन्य सपोर्ट एयरक्राफ्ट भाग लेंगे। अभ्यास पाकिस्तान के कराची से 200 नौटिकल मील दूर आयोजित होगा। इसके लिए NOTAM जारी किया गया है।
सैन्य सहयोग और पिछला अनुभव:
तीनों देशों ने दिसंबर 2024 में “Desert Night” वायु युद्ध अभ्यास किया था। भारत खाड़ी देशों और अन्य साझेदार देशों जैसे फ्रांस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास कर रहा है। ये अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों में लड़ाकू कौशल, रणनीति और प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद करते हैं।
त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास का इतिहास:
भारत, फ्रांस और UAE की नौसेनाओं ने जून 2023 में पहला त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास किया था। इसमें परंपरागत और गैर-परंपरागत खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। साल 2022 में विदेश मंत्रियों के त्रिपक्षीय ढांचे के तहत तीनों देशों ने रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सामूहिक रूप से काम करना शुरू किया।
हाल के सैन्य अभ्यास:
मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की नौसेना, वायु सेना और थल सेना लगातार अभ्यास कर रही हैं। हाल में राजस्थान में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान और पश्चिमी सीमा पर त्रिशुल अभियान भी आयोजित हुए।
Suggested Internal Links:

