मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला देते हुए कहा कि नीलामी से खरीदे गए फ्लैट पर भी सोसाइटी के पुराने बकाए चुकाना खरीदार की जिम्मेदारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बकाया चुकाए बिना सोसाइटी की सदस्यता नहीं दी जा सकती। यह व्यवस्था हॉउसिंग सोसाइटी की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
यह फैसला न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकलपीठ ने दहिसर स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी के पक्ष में सुनाया।
कोर्ट ने क्या कहा?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा:
- सरफेसी एक्ट के तहत खरीदा गया फ्लैट भी अपवाद नहीं है।
- सोसाइटी के वैध बकाए का भुगतान करना खरीदार की कानूनी जिम्मेदारी है।
- बकाया लिए बिना सोसाइटी को हस्तांतरण स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
- यह नियम सोसाइटी की वित्तीय सेहत की रक्षा करता है, क्योंकि सुविधा और रखरखाव का खर्च सदस्यों से ही आता है।
मामला क्या था?
दहिसर की एक सोसाइटी में एक फ्लैट मालिक पर
₹57,96,197 का भारी-भरकम मेंटेनेंस बकाया था।
- सोसाइटी ने कई बार नोटिस भेजे, पर मालिक ने कोई जवाब नहीं दिया।
- इसके बाद बैंक ने फ्लैट को कब्जे में लेकर नीलामी में डाल दिया।
- सोसाइटी ने बैंक को भी बकाए की जानकारी दी थी।
- फिर भी बैंक ने सोसाइटी के NOC के बिना ही फ्लैट की नीलामी कर दी।
- नीलामी खरीदार ने बाद में सोसाइटी सदस्यता के लिए आवेदन किया।
- सोसाइटी ने बकाया राशि के कारण सदस्यता देने से इनकार कर दिया।
खरीदार ने इस इनकार के खिलाफ शिकायत की, लेकिन हाई कोर्ट ने सोसाइटी के फैसले को सही ठहराया।
सोसाइटी के खिलाफ पुराने आदेश रद्द
अदालत ने कहा कि अगर सोसाइटी पर बिना बकाया वसूले फ्लैट ट्रांसफर करने का दबाव डाला गया, तो वह:
- नियमित खर्च वसूल नहीं कर पाएगी
- अन्य सदस्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा
- सोसाइटी का प्रबंधन प्रभावित होगा
इसीलिए कानून में यह व्यवस्था बनाई गई है कि मेंबरशिप से पहले सभी बकाया साफ होना अनिवार्य है।

