26 नवंबर हर साल देशभर में संविधान दिवस मनाया जाता है। इस दिन 1949 में संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारतीय संविधान को स्वीकार किया था।
इस वर्ष, यह दिन उस महान शख्सियत — B. R. Ambedkar — को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्हें ‘संविधान निर्माता / जनक’ के रूप में याद किया जाता है।
🔎 अंबेडकर का विशेष योगदान
- अंबेडकर को संविधान की मसौदा समिति (Drafting Committee) का अध्यक्ष बनाया गया था।
- संविधान के प्रस्तावित मसौदे को तैयार करने की ज़िम्मेदारी उन्हीं की कमेटी को दी गई थी।
- अंबेडकर ने लगभग 15 अन्य समितियों में भी हिस्सा लिया, जिससे संविधान निर्माण में उनकी व्यापक कानूनी और सामाजिक समझ झलकी।
🏛️ संविधान दिवस का महत्व
- 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को स्वीकार किया; इसे लागू 26 जनवरी 1950 को किया गया — यही दिन अब गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर को औपचारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया।
- यह दिन नागरिकों को संविधान के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे मूल्यों की याद दिलाता है।
✅ हमें क्या याद रखना चाहिए
- संविधान सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है जिन पर भारत का लोकतंत्र आधारित है।
- अंबेडकर जैसे देशभक्त और विचारशील नेताओं का योगदान हमेशा याद रखना चाहिए।
- संविधान दिवस पर नागरिकों को संविधान की प्रस्तावना, उसके अधिकार और कर्तव्यों को समझना चाहिए और उनके अनुसार अपने जीवन में पालन करना चाहिए।

