ईसीएमएस के तहत मंजूर नए प्रोजेक्ट्स से 82,243 करोड़ रुपये के उत्पादन और करीब 75 हजार प्रत्यक्ष नौकरियों की उम्मीद है. अब तक योजना के तहत 69,548 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है.
भारत को इलेक्ट्रॉनिक निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. सोमवार, 17 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत 7,877 करोड़ रुपये के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से देश में 82,243 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद है. साथ ही, बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.
हजारों लोगों को मिलेगी सीधी नौकरी
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन नए प्रोजेक्ट्स से करीब 75 हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि ढाई लाख से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.
ईसीएमएस ने अपने शुरुआती निवेश लक्ष्य को भी पीछे छोड़ दिया है. अब तक योजना के तहत 69,548 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि शुरुआत में 59,350 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था.
मंत्री के अनुसार, अब तक कुल 106 कंपनियों को इस योजना के तहत मंजूरी मिल चुकी है. इनमें से 38 कंपनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि 16 कंपनियां अभी निर्माण के चरण में हैं.
विप्रो से लेकर पीसीबीएल तक को मंजूरी
नए निवेश प्रस्तावों में कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं. विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग को 1,401 करोड़ रुपये और माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मोल्डिंग को 565 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी मिली है.
इसके अलावा आरपी संजीव गोयनका समूह की कंपनी पीसीबीएल केमिकल को 329 करोड़ रुपये और मिंडा इंस्ट्रूमेंट को 270 करोड़ रुपये के निवेश के लिए मंजूरी दी गई है.
वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स और सिरमा एसजीएस जैसी कंपनियों को भी अलग-अलग निवेश प्रस्तावों के लिए मंजूरी मिली है. इन कंपनियों की मंजूरी के बाद 18 अगस्त को शेयर बाजार में संबंधित कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की नजर रहने की उम्मीद है.
सरकार ने गुणवत्ता और स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर दिया जोर
निवेश और उत्पादन में तेजी के बावजूद सरकार कुछ क्षेत्रों में अभी और सुधार चाहती है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश में स्थानीय स्तर पर डिजाइन तैयार करने वाली इंडस्ट्री की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है.
उन्होंने स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया. मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग में ‘सिक्स सिग्मा’ मानकों के पालन की जरूरत पर भी जोर दिया.
अश्विनी वैष्णव ने योग्य प्रतिभाओं की कमी को भी उद्योग के लिए चुनौती बताया. उनके मुताबिक, सही प्रतिभा तलाशना अभी भी एक बड़ी समस्या है और इस दिशा में मौजूदा प्रयासों से 10 गुना ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है.
बजट में योजना का बढ़ाया गया था आवंटन
ईसीएमएस को सरकार ने 2026-27 के आम बजट में भी बड़ा बढ़ावा दिया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को इस योजना का बजट 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया था.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट के उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का मजबूत हिस्सा बनाना है.
सरकार की ओर से निवेश को बढ़ावा देने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिशों से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को आने वाले वर्षों में और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

