Google का AI ट्रांसलेटर बदलेगा भाषा की दीवार, बिना इंटरनेट बोलेगा दूसरी भाषा; जानें कैसे करता है काम

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Google ने Antigravity के साथ मिलकर एक पोर्टेबल AI ट्रांसलेटर डिवाइस तैयार किया है, जो आवाज सुनकर दूसरी भाषा में अनुवाद कर उसे तुरंत सुनाता है। खास बात यह है कि इसके लिए हर बार इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि बातचीत का डेटा डिवाइस पर ही प्रोसेस किया जा सकता है।

भाषा की दीवार को कम करने की दिशा में AI तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में Google ने Antigravity के साथ मिलकर एक छोटा और पोर्टेबल AI ट्रांसलेटर तैयार किया है, जिसे आसानी से जेब में रखा जा सकता है। यह डिवाइस यूजर की आवाज सुनकर उसे दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करता है और अनुवाद को तुरंत सुनाता भी है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि हर बार इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। बातचीत से जुड़ा डेटा क्लाउड सर्वर पर भेजने के बजाय डिवाइस पर ही प्रोसेस किया जा सकता है।

क्या है Google का AI Gemma Translator?

यह एक ऑफलाइन AI ट्रांसलेटर है, जिसमें Gemma 4 E2B नाम के ओपन AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। पूरे सिस्टम को Raspberry Pi 5, माइक्रोफोन और स्पीकर के साथ 3D-प्रिंटेड बॉडी में फिट किया गया है।

डिवाइस का डिजाइन छोटा और पोर्टेबल रखा गया है, ताकि इसे यात्रा के दौरान आसानी से साथ ले जाया जा सके। इसमें आवाज रिकॉर्ड करने, उसे समझने और दूसरी भाषा में बदलने की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर की जाती है।

बिना इंटरनेट कैसे करता है ट्रांसलेशन?

आमतौर पर AI ट्रांसलेशन सेवाओं में यूजर की आवाज इंटरनेट के जरिए क्लाउड सर्वर तक पहुंचती है। वहां AI मॉडल आवाज को प्रोसेस करके उसका अनुवाद तैयार करता है और फिर उसे डिवाइस पर भेजा जाता है। इसी वजह से इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होता है।

Gemma Translator में प्रक्रिया अलग है। इसमें AI मॉडल सीधे डिवाइस पर चलता है। इस तकनीक को ऑन-डिवाइस AI या एज AI कहा जाता है। इसका फायदा यह है कि नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर भी डिवाइस स्थानीय कंप्यूटिंग के जरिए ट्रांसलेशन करने में सक्षम हो सकता है।

यात्रियों से लेकर अस्पतालों तक आ सकता है काम

यह तकनीक खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो खराब नेटवर्क वाले इलाकों में यात्रा करते हैं। विदेश यात्रा के दौरान स्थानीय भाषा समझने और बातचीत करने में भी यह मददगार हो सकती है।

इसके अलावा अस्पताल, कंपनियां और दूसरे संस्थान संवेदनशील बातचीत या डेटा को क्लाउड पर भेजे बिना स्थानीय स्तर पर प्रोसेस कर सकते हैं। इससे डेटा की प्राइवेसी को भी फायदा मिल सकता है।

हालांकि, ऐसे छोटे ऑन-डिवाइस AI सिस्टम की वास्तविक स्पीड और ट्रांसलेशन की गुणवत्ता उसके हार्डवेयर, AI मॉडल और सपोर्टेड भाषाओं पर निर्भर करेगी। फिर भी यह प्रोजेक्ट संकेत देता है कि भविष्य में AI केवल क्लाउड सर्वर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और पोर्टेबल डिवाइस में भी सीधे काम कर सकेगा।

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