सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहा AI फोटो का खतरा
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर हर दिन हजारों तस्वीरें वायरल होती हैं। इनमें से कई तस्वीरें लोगों को चौंका देती हैं और कई बार लोग बिना जांचे-परखे उन्हें सच भी मान लेते हैं। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती तकनीक ने अब फेक तस्वीरों को इतना रियलिस्टिक बना दिया है कि असली और नकली फोटो में फर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।
पहले AI से बनी तस्वीरों में चेहरों, हाथों या बैकग्राउंड में साफ गड़बड़ी नजर आ जाती थी, लेकिन अब नई AI तकनीकें बेहद एडवांस हो चुकी हैं। ऐसे में किसी भी वायरल तस्वीर पर आंख बंद करके भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
AI फोटो में कहां छिपी होती हैं गलतियां?
हालांकि AI इमेज पहले से ज्यादा वास्तविक दिखने लगी हैं, लेकिन उनमें अभी भी कुछ छोटी गलतियां पकड़ में आ सकती हैं।
हाथ और उंगलियों पर दें ध्यान
AI से बनी तस्वीरों में कई बार हाथों की उंगलियां असामान्य दिखती हैं। कभी उंगलियों की संख्या ज्यादा होती है तो कभी उनका आकार अजीब नजर आता है।
दांत, आंखें और ज्वेलरी में गड़बड़ी
ऐसी तस्वीरों में दांत असमान या अजीब तरीके से जुड़े हुए दिख सकते हैं। चश्मा, इयररिंग्स और ज्वेलरी भी कई बार सही एंगल या डिजाइन में नजर नहीं आते।
टेक्स्ट अक्सर होता है गलत
AI इमेज में लिखा गया टेक्स्ट अक्सर उल्टा-पुल्टा या समझ से बाहर होता है। पोस्टर, बोर्ड या बैनर पर लिखे शब्दों को ध्यान से देखने पर फर्जीवाड़ा पकड़ में आ सकता है।
रोशनी और छाया का तालमेल जांचें
अगर तस्वीर में लाइटिंग और शैडो का बैलेंस असामान्य लगे या भीड़ में लोगों के चेहरे एक जैसे दिखाई दें, तो संभावना है कि फोटो AI से बनाई गई हो।
AI फोटो पकड़ने में कैसे मदद करते हैं ChatGPT और Gemini?
अब बड़ी टेक कंपनियां भी AI जनरेटेड कंटेंट की पहचान के लिए नए टूल्स तैयार कर रही हैं।
OpenAI ने ऐसे सिस्टम विकसित किए हैं जो तस्वीरों में मौजूद डिजिटल पैटर्न और AI संकेतों को पहचानने में मदद करते हैं। यूजर्स फोटो अपलोड करके यह जांच सकते हैं कि तस्वीर AI से बनाई गई है या एडिट की गई है।
वहीं Google का Google Gemini भी SynthID तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह तकनीक AI इमेज में मौजूद खास डिजिटल मार्कर्स की पहचान कर सकती है। यूजर Gemini में फोटो अपलोड कर सीधे पूछ सकते हैं कि तस्वीर AI जनरेटेड है या नहीं।
Reverse Image Search है सबसे आसान तरीका
किसी भी वायरल फोटो की सच्चाई जानने के लिए Reverse Image Search बेहद कारगर तरीका माना जाता है।
इस प्रक्रिया में तस्वीर को सर्च इंजन पर अपलोड करके यह पता लगाया जा सकता है कि वह फोटो इंटरनेट पर पहली बार कब और कहां दिखाई दी थी। इससे यह भी पता चल जाता है कि कहीं एक ही फोटो अलग-अलग दावों के साथ वायरल तो नहीं हो रही।
अगर कोई तस्वीर कई अलग-अलग फर्जी दावों के साथ शेयर की जा रही हो, तो उसके AI जनरेटेड या फेक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
AI के दौर में सतर्क रहना क्यों जरूरी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में AI जनरेटेड कंटेंट और ज्यादा रियलिस्टिक होगा। ऐसे में किसी भी वायरल तस्वीर, वीडियो या दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करना बेहद जरूरी है।
फर्जी तस्वीरें न सिर्फ लोगों को गुमराह कर सकती हैं बल्कि कई बार अफवाह और गलत जानकारी फैलाने का कारण भी बनती हैं। इसलिए डिजिटल जागरूकता और फैक्ट चेकिंग आज पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।

