IIT-IIM, लंदन की नौकरी छोड़ बनीं IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा, सियासी टकरावों से भी रहा नाता

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देवरिया से मिर्जापुर तक प्रशासनिक फैसलों को लेकर चर्चा में रहीं दिव्या मित्तल, जनप्रतिनिधियों से टकराव के बाद कई बार सुर्खियों में आया नाम

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में कुछ नौकरशाह अपनी फाइल वर्क से ज्यादा अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। 2013 बैच की यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल भी ऐसा ही एक नाम हैं। फील्ड पोस्टिंग के दौरान जनता से सीधे जुड़ाव और प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनकी स्पष्ट राय कई बार चर्चा का विषय बनी। अपने एक दशक से ज्यादा लंबे प्रशासनिक करियर में वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं और अलग-अलग जिलों में अपने काम को लेकर पहचान बनाई।

देवरिया में जनप्रतिनिधियों से टकराव ने बटोरी सुर्खियां

दिव्या मित्तल के कार्यकाल का सबसे चर्चित दौर देवरिया की जिलाधिकारी रहते हुए सामने आया। जुलाई 2025 में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग को लेकर सवाल उठे। बैठक में भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, विधायक शलभ मणि त्रिपाठी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इसी दौरान दिव्या मित्तल ने सार्वजनिक रूप से जनप्रतिनिधियों से कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए प्रशासन पर अनुचित दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में मामला गरमा गया।

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की बात सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी अधिकारी को नियम सिखाने की जरूरत नहीं है। विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को नियम-कायदे समझाने की जगह अधिकारियों को अपना काम करना चाहिए।

अनुप्रिया पटेल से अनबन और 10 महीने की वेटिंग

देवरिया से पहले मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए भी दिव्या मित्तल का नाम प्रशासन और राजनीति के बीच टकराव को लेकर चर्चा में आया था। मिर्जापुर के सुदूर पहाड़ी गांव लहुरियादह में पाइपलाइन बिछाकर नल का पानी पहुंचाने की योजना में उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई थी। इस काम के बाद वह ग्रामीणों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई थीं।

हालांकि, इस परियोजना के उद्घाटन और श्रेय को लेकर केंद्रीय मंत्री एवं स्थानीय सांसद अनुप्रिया पटेल के खेमे की नाराजगी की खबरें सामने आईं। आरोप लगाया गया कि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज किया गया।

सितंबर 2023 में जब दिव्या मित्तल का तबादला मिर्जापुर से बस्ती किया गया, तब स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने उन्हें भव्य विदाई दी। इस दौरान सड़कों पर फूलों की बारिश भी की गई। हालांकि, इसके तुरंत बाद शासन ने उनका बस्ती तबादला रद्द कर दिया और उन्हें करीब 10 महीने तक वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखा गया।

IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई, लंदन में की नौकरी

दिव्या मित्तल की शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि भी बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बैंगलोर से MBA किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में वैश्विक वित्तीय कंपनी जेपी मॉर्गन में ट्रेडर के तौर पर काम किया।

देश सेवा के उद्देश्य से वह 2012 में भारत लौटीं। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और 68वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। इसके आधार पर वह 2013 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अशोक बंबावाले पुरस्कार भी मिला।

इन महत्वपूर्ण पदों पर रहीं दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह मेरठ क्षेत्र और सीतापुर के सिधौली में एसडीएम एवं जॉइंट मजिस्ट्रेट रहीं। इसके बाद उन्होंने नीति आयोग में असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में काम किया। गोंडा में सीडीओ और बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।

वह संत कबीरनगर की जिलाधिकारी भी रहीं। इसके बाद सितंबर 2022 से सितंबर 2023 तक मिर्जापुर की डीएम रहीं। सितंबर 2023 से जुलाई 2024 तक वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रहने के बाद उन्हें यूपी ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी का सीईओ बनाया गया।

जुलाई 2024 से मई 2026 तक उन्होंने देवरिया की जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। मई 2026 से इस्तीफा देने तक वह उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।

‘मूर्ख थी जो सोचा था कुछ देने आई हूं, सबसे ज्यादा मैंने ही पाया’

इस्तीफे का ऐलान करते हुए दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि साधारण परिवेश में पलते हुए उन्होंने एक अच्छे जीवन का सपना देखा था। IIT दिल्ली, IIM बैंगलोर और लंदन में नौकरी के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा महसूस होता था। उन्हें अपने देश में न होना खलता था।

उन्होंने कहा कि उनकी पढ़ाई, आत्मविश्वास और दुनिया में सिर उठाकर चलने की ताकत इस मिट्टी का कर्ज थी और वह उसे चुकाने भारत लौटी थीं। अपने संदेश में उन्होंने देवरिया और मिर्जापुर में मिले अनुभवों का भी जिक्र किया।

दिव्या मित्तल ने लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कर्तव्य है, जबकि मिर्जापुर ने सिखाया कि असंभव सिर्फ एक राय है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में उन्होंने सीखा कि शक्ति पद से नहीं, बल्कि विश्वास से आती है।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने लिखा कि वह मूर्ख थीं जो यह सोचकर आई थीं कि कुछ देने आई हैं, जबकि सच यह है कि उन्होंने सबसे ज्यादा पाया और यह कर्ज और भी बढ़ गया। उनके मुताबिक आज पद छूट गया है, लेकिन लोगों का वह स्पर्श और देश के लिए देखा गया सपना कभी नहीं छूटेगा।

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