कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीति में फिर हलचल बढ़ गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक 10 विधायक दिल्ली पहुंचे हैं। सिद्धारमैया–शिवकुमार सत्ता-बंटवारे पर खींचतान के बीच नेतृत्व पर दबाव बढ़ा।
कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी, शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली में
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच चल रही तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। गुरुवार रात शिवकुमार खेमे के लगभग 10 कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच गए, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
विधायक शुक्रवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और शनिवार सुबह केसी वेणुगोपाल से मुलाकात करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद कर्नाटक में लंबे समय से लंबित सत्ता-बंटवारे के फार्मूले पर फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।
कौन-कौन विधायक पहुंचे दिल्ली?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जो विधायक गुरुवार को दिल्ली पहुंचे, उनमें शामिल हैं—
- दिनेश गूलीगौड़ा
- रवि गनीगा
- गुब्बी वासु
जबकि शुक्रवार को आने वाले विधायकों में—
- अनेकल शिवन्ना
- नेलमंगला श्रीनिवास
- इकबाल हुसैन
- कुनिगल रंगनाथ
- शिवगंगा बसवराजू
- बालकृष्ण
इसके अलावा भी कुछ अन्य विधायक दिल्ली पहुंच सकते हैं।
विधायक इकबाल हुसैन ने कहा—
“हम कोई सोना-हीरा मांगने नहीं आए हैं। हम सिर्फ डीके शिवकुमार के लिए नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।”
शिवकुमार ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे के संकेत दिए
दिल्ली घटनाक्रम से पहले, डीके शिवकुमार ने बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया कि वे जल्द ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा—
“मैं इस पद पर स्थायी नहीं रह सकता। 5.5 साल हो चुके हैं, मार्च में 6 साल हो जाएंगे। दूसरों को भी मौका मिलना चाहिए। लेकिन मैं नेतृत्व में रहूंगा और पार्टी के लिए काम करता रहूंगा।”
उनका यह बयान राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
सिद्धारमैया ने दौरा रद्द किया, शिवकुमार बोले—बीमार हूं
राजनीतिक हलचल के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अचानक अपना चामराजनगर और मैसूर का दो दिवसीय दौरा रद्द कर दिया।
वे सभी कार्यक्रम रद्द करके सुबह ही बेंगलुरु लौट आए।
दूसरी ओर, शिवकुमार ने कहा कि वे बीमार हैं और घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्होंने विधायकों के दिल्ली जाने की जानकारी होने से इनकार किया।
पृष्ठभूमि: सत्ता-बंटवारे पर अटका मामला
मई 2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा को हराकर सरकार बनाई थी। उस समय ही सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार की खींचतान सीएम पद को लेकर सामने आई थी।
समाधान के रूप में रोटेशनल CM फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया था—
- ढाई साल सिद्धारमैया
- ढाई साल शिवकुमार
कांग्रेस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं की, लेकिन अब सरकार को ढाई साल होने के बाद शिवकुमार खेमे की ओर से CM बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है।

