महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कई सीटों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने और कुछ स्थानों पर बागी उम्मीदवारों के मैदान में बने रहने के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने सत्ताधारी महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए राउत से सबूत पेश करने की मांग की है।
निर्विरोध जीत के पीछे धनबल के इस्तेमाल का आरोप
मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की समृद्ध राजनीतिक परंपरा को सत्ता और धन के प्रभाव से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि विधान परिषद चुनाव में कई सीटों पर निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्दे के पीछे बड़े पैमाने पर धनबल का इस्तेमाल किया गया।
राउत के अनुसार, पुणे और कोंकण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विपक्षी और निर्दलीय उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
‘एक दिन में बहाए गए करोड़ों रुपये’
संजय राउत ने दावा किया कि निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित करने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये का वित्तीय नेटवर्क सक्रिय था। उन्होंने कहा कि विरोधी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान से हटाने के लिए एक ही दिन में भारी रकम का लेन-देन किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सामान्य राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि खुले तौर पर की गई ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ है। राउत ने कहा कि यदि इस तरह की प्रवृत्ति जारी रही तो भविष्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पुणे, कोंकण और संभाजीनगर की सीटों का किया उल्लेख
अपने आरोपों के दौरान संजय राउत ने पुणे, कोंकण और छत्रपति संभाजीनगर की सीटों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में केवल आर्थिक प्रलोभन ही नहीं बल्कि कुछ उम्मीदवारों पर प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने की भी कोशिश की गई।
राउत ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के चुनाव में धनबल और दबाव की राजनीति हावी होगी तो आम नागरिकों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
बीजेपी का पलटवार, कहा- सबूत पेश करें
संजय राउत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने राउत के दावों को निराधार और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।
भाजपा ने कहा कि हर चुनाव के दौरान हार की आशंका को देखते हुए विपक्ष इस तरह के आरोप लगाता है। पार्टी ने राउत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण है तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। भाजपा ने यह भी कहा कि बिना सबूत लगाए गए आरोप जनता को गुमराह करने का प्रयास हैं।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्ष सत्ताधारी गठबंधन पर धनबल और दबाव की राजनीति के आरोप लगा रहा है, वहीं महायुति इन आरोपों को राजनीतिक हताशा बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

