अगर लैपटॉप धीमा चल रहा है, ऐप्स खुलने में समय लग रहा है या मल्टीटास्किंग के दौरान लैग हो रहा है, तो हर बार रैम अपग्रेड करना जरूरी नहीं है। कुछ आसान सिस्टम सेटिंग्स और बेहतर मेमोरी मैनेजमेंट से बिना नया हार्डवेयर खरीदे लैपटॉप की परफॉर्मेंस में सुधार किया जा सकता है।
अगर आपका लैपटॉप धीमा चल रहा है, ऐप्स खुलने में समय ले रहे हैं या मल्टीटास्किंग के दौरान लैग हो रहा है, तो हर बार रैम अपग्रेड करना जरूरी नहीं है। डीडीआर5 रैम की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की कमी के बीच नया हार्डवेयर खरीदना महंगा पड़ सकता है। ऐसे में कुछ आसान सिस्टम सेटिंग्स और सही मेमोरी मैनेजमेंट की मदद से बिना पैसे खर्च किए लैपटॉप की परफॉर्मेंस बेहतर की जा सकती है।
रीस्टार्ट करने से लेकर अनचाहे स्टार्टअप ऐप्स बंद करने और जंक फाइल्स हटाने तक कई आसान तरीके इसमें मदद कर सकते हैं।
लैपटॉप को करें रीस्टार्ट
अगर लैपटॉप कई दिनों तक बंद या रीस्टार्ट नहीं किया जाता, तो बैकग्राउंड में चल रहे काम और फालतू डेटा जमा होते रहते हैं। इससे सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है और लैपटॉप धीमा महसूस हो सकता है।
ऐसे में लैपटॉप को रीस्टार्ट करने से जमा हुआ फालतू काम साफ हो जाता है और सिस्टम नए सिरे से काम करना शुरू करता है। अगर आपका लैपटॉप अचानक स्लो हो गया है, तो सबसे पहले उसे रीस्टार्ट करके देखना एक आसान तरीका हो सकता है।
स्टार्टअप ऐप्स को करें बंद
कई ऐप्स और सॉफ्टवेयर ऐसे होते हैं, जो लैपटॉप ऑन होते ही अपने आप बैकग्राउंड में चलने लगते हैं। इससे लैपटॉप का बूटिंग टाइम बढ़ता है और रैम की खपत भी होती है।
विंडोज में कंट्रोल + शिफ्ट + एस्केप दबाकर टास्क मैनेजर खोला जा सकता है। इसके स्टार्टअप टैब में जाकर उन ऐप्स को डिसेबल किया जा सकता है, जिनकी तुरंत जरूरत नहीं होती। इससे सिस्टम शुरू होते समय अनचाहे ऐप्स अपने आप चलने से बच सकते हैं।
टास्क मैनेजर से पहचानें ज्यादा रैम खाने वाले ऐप्स
विंडोज में टास्क मैनेजर और मैक में एक्टिविटी मॉनिटर की मदद से यह देखा जा सकता है कि कौन-सा ऐप सबसे ज्यादा रैम और सीपीयू इस्तेमाल कर रहा है।
कई बार मेमोरी लीक जैसी दिक्कत के कारण कोई ऐप जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगता है। ऐसे ऐप की पहचान करके उसे वहीं से बंद किया जा सकता है। इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि लैपटॉप की मेमोरी पर सबसे ज्यादा दबाव किस ऐप या प्रोसेस की वजह से पड़ रहा है।
ब्राउजर टैब और बैकग्राउंड ऐप्स रखें कंट्रोल में
एक साथ बहुत सारे ब्राउजर टैब और भारी ऐप्स खुले रहने से रैम पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए जिन ऐप्स पर काम नहीं हो रहा है, उन्हें पूरी तरह बंद कर देना बेहतर है।
गूगल क्रोम और दूसरे ब्राउजर में उपलब्ध मेमोरी फीचर का इस्तेमाल करके भी मेमोरी पर दबाव कम किया जा सकता है। खासकर मल्टीटास्किंग के दौरान गैर-जरूरी टैब और ऐप्स बंद रखने से सिस्टम को ज्यादा स्मूथ तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।
जंक फाइल्स हटाकर खाली करें स्टोरेज
जब लैपटॉप की रैम पूरी भर जाती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम स्टोरेज की खाली जगह को वर्चुअल मेमोरी के तौर पर इस्तेमाल करता है। ऐसे में स्टोरेज में पर्याप्त खाली जगह होना जरूरी है।
सिस्टम से टेम्पररी और जंक फाइल्स को नियमित रूप से हटाकर स्टोरेज खाली रखा जा सकता है। इससे लैपटॉप को काम करने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और सिस्टम को ज्यादा स्मूथ तरीके से चलाने में मदद मिल सकती है।
इसलिए रैम अपग्रेड करने से पहले मेमोरी और स्टोरेज मैनेजमेंट पर ध्यान देना भी जरूरी है।

