लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: बायोमेट्रिक लॉक, इमरजेंसी एग्जिट की कमी और फायर सेफ्टी में लापरवाही से गईं 15 जानें

Thecity news
4 Min Read

अलीगंज हादसे की शुरुआती जांच में बड़े खुलासे, व्यावसायिक उपयोग की अनुमति और प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली, जबकि पांच अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद शुरू हुई जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डिंग में न तो पर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजाम थे और न ही आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था, जिसके चलते आग लगने के बाद अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके।

बायोमेट्रिक सिस्टम बना मौत का कारण!

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, बिल्डिंग के मुख्य ऑफिस का प्रवेश द्वार बायोमेट्रिक थंब इम्प्रेशन सिस्टम से संचालित होता था। आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित होने और सिस्टम फेल होने से गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया। इससे अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने में असफल रहे और कई लोग आग व धुएं के बीच फंस गए।

इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने से बढ़ा हादसा

जांच में यह भी सामने आया है कि बिल्डिंग में किसी प्रकार का इमरजेंसी एग्जिट नहीं बनाया गया था। आग लगने जैसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इमरजेंसी एग्जिट होता तो मृतकों की संख्या काफी कम हो सकती थी।

भवन स्वामित्व और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया जांच के दायरे में

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर यह भवन बना है वह वीरेंद्र शुक्ला के नाम पर दर्ज है, जबकि भवन का नक्शा सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम पर पास कराया गया था। बताया जा रहा है कि वीरेंद्र शुक्ला रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालक हैं। अब जांच एजेंसियां भवन निर्माण और स्वीकृति प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही हैं।

कमर्शियल उपयोग के बावजूद नहीं लगाए गए फायर सेफ्टी सिस्टम

जांच में सामने आया है कि भवन में अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था नहीं थी। वर्ष 2014 में इस आवासीय भवन के नक्शे को संशोधित कर व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया गया, जिस पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लखनऊ विकास प्राधिकरण की भूमिका पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार, इस भवन में लंबे समय से पेट शॉप, लाइब्रेरी और एनिमेशन सेंटर संचालित किए जा रहे थे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद गतिविधियां जारी रहने से अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई की जाती तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

हादसे के बाद कार्रवाई की मांग तेज

अग्निकांड के बाद प्रशासन ने जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नियमों की अनदेखी, फायर सेफ्टी में लापरवाही और प्रशासनिक मिलीभगत ने 15 लोगों की जान ले ली। अब पूरे प्रदेश की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है और यह देखा जाएगा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *