Maa Behen Review: लंबे समय बाद पर्दे पर लौटीं माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘मां बहन’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। ब्लैक कॉमेडी और क्राइम ड्रामा के मिश्रण से बनी यह फिल्म एक अनोखी कहानी पेश करती है, जिसमें पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक धारणाओं और अपराध के बीच हास्य का तड़का देखने को मिलता है। निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने फिल्म को अलग अंदाज में पेश करने की कोशिश की है, हालांकि इसकी धीमी पटकथा कुछ जगहों पर दर्शकों की परीक्षा भी लेती है।
क्या है ‘मां बहन’ की कहानी?
फिल्म की कहानी रेखा (माधुरी दीक्षित) और उनकी दो बेटियों जया (तृप्ति डिमरी) और सुषमा (धरना दुर्गा) के इर्द-गिर्द घूमती है। पति की मृत्यु के बाद रेखा अपनी बेटियों के साथ रहती हैं, लेकिन कॉलोनी में उनकी छवि अच्छी नहीं मानी जाती। मोहल्ले के लोग मां-बेटियों को लेकर तरह-तरह की बातें करते हैं और उनसे दूरी बनाए रखते हैं।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब रेखा अपनी बेटियों को फोन कर बताती है कि पड़ोस में रहने वाले गुप्ता जी के साथ एक गंभीर हादसा हो गया है और घटना उनके घर में हुई है। मां की मदद के लिए पहुंचीं दोनों बेटियां इस मामले को संभालने की कोशिश करती हैं, लेकिन धीरे-धीरे घटनाएं उलझती चली जाती हैं। इसके बाद फिल्म में कॉमेडी, सस्पेंस और क्राइम का दिलचस्प मिश्रण देखने को मिलता है।
अभिनय है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
रेखा के किरदार में माधुरी दीक्षित ने शानदार अभिनय किया है। उन्होंने एक मां की संवेदनशीलता और मजबूती को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। लंबे समय बाद उन्हें बड़े किरदार में देखना दर्शकों के लिए सुखद अनुभव साबित होता है।
वहीं तृप्ति डिमरी ने जया के किरदार में जबरदस्त ऊर्जा दिखाई है। उनका आत्मविश्वास, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूती प्रदान करते हैं। तृप्ति अपने किरदार के साथ पूरी तरह न्याय करती नजर आती हैं।
रवि किशन का स्क्रीन टाइम भले ही सीमित है, लेकिन गुप्ता जी के रोल में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। वहीं सुषमा के किरदार में धरना दुर्गा का प्रदर्शन भी प्रभावशाली है और वह कहानी में संतुलन बनाए रखती हैं।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने फिल्म के कॉन्सेप्ट को रोचक तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की है। फिल्म सामाजिक सोच, महिलाओं को लेकर बनी धारणाओं और अपराध के बीच हास्य पैदा करती है। हालांकि इसकी कहानी और अधिक प्रभावशाली बन सकती थी।
स्क्रीनप्ले कई जगह धीमा महसूस होता है, जिसके कारण फिल्म कुछ दृश्यों में दर्शकों का ध्यान बनाए रखने में संघर्ष करती दिखाई देती है। बावजूद इसके, फिल्म का अनोखा विषय और कलाकारों की मजबूत परफॉर्मेंस इसे देखने लायक बनाती है।
फाइनल वर्डिक्ट
‘मां बहन’ एक ऐसी ब्लैक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जो अपने अलग विषय और दमदार अभिनय के कारण प्रभावित करती है। हालांकि कहानी और स्क्रीनप्ले में थोड़ी और कसावट होती तो यह फिल्म और बेहतर बन सकती थी। अगर आप क्राइम, डार्क ह्यूमर और पारिवारिक ड्रामा का मिश्रण पसंद करते हैं तो यह फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है।
रेटिंग: 3/5 स्टार

