विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली कमाई पर टैक्स राहत का रास्ता साफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को राहत देने से जुड़े बड़े फैसले को मंजूरी दी गई है। सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियों के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से आयकर नियमों में बदलाव का प्रस्ताव मंजूर किया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड्स और प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर महत्वपूर्ण कर राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संबंधित अध्यादेश लागू होने पर यह प्रावधान प्रभावी होगा।
भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर जोर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारतीय वित्तीय बाजारों में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी प्रतिभूतियों की मांग बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, कर बोझ कम होने से वैश्विक निवेशक भारतीय बॉन्ड बाजार में अधिक रुचि दिखा सकते हैं।
इस कदम का उद्देश्य भारतीय पूंजी बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए निवेश माहौल को आकर्षक बनाना है।
कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत का प्रस्ताव
नई व्यवस्था के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स से राहत देने का प्रस्ताव है। वर्तमान नियमों के अनुसार, एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक रखे गए निवेश पर कर देनदारी लागू होती है।
सरकार का मानना है कि टैक्स राहत मिलने से विदेशी फंड्स का प्रवाह बढ़ेगा और भारतीय वित्तीय बाजारों में तरलता मजबूत होगी।
विदहोल्डिंग टैक्स नियमों में भी बदलाव
पहले विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स से प्राप्त ब्याज आय पर विदहोल्डिंग टैक्स का भुगतान करना पड़ता था। उद्योग जगत लंबे समय से इस कर व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहा था। नए प्रावधान लागू होने के बाद विदेशी निवेशकों को अतिरिक्त आर्थिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बन सकता है।
शेयर बाजार और रुपये को मिल सकता है समर्थन
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेश में वृद्धि से भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार दोनों को मजबूती मिल सकती है। साथ ही विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने से रुपये की स्थिति भी अधिक स्थिर रहने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के बीच यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और बाजार में पूंजी प्रवाह बनाए रखने में यह फैसला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निवेशकों की नजर अगले कदम पर
अब निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की निगाहें सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने और लागू करने की प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिसका लाभ दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

