मुंबई। मानसून की दस्तक से पहले मुंबई में नाला सफाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) जहां शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई 100 प्रतिशत से अधिक होने का दावा कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में नालों में अब भी कचरे का ढेर दिखाई दे रहा है, जिससे आगामी बारिश के दौरान जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका बढ़ गई है।
114 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी अधूरी सफाई के आरोप
बीएमसी के अनुसार वर्ष 2026 में बड़े नालों, छोटे नालों और मीठी नदी की सफाई के लिए लगभग 114 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नाला सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है और ठेकेदारों ने करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित कार्य नहीं किया।
शहर के विभिन्न हिस्सों में किए गए निरीक्षण में कई नालों में कचरे का अंबार और गाद जमा दिखाई दी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कागजों पर दिखाई गई सफाई और वास्तविक स्थिति में इतना बड़ा अंतर क्यों है।
बीएमसी का दावा- 100 प्रतिशत से अधिक सफाई पूरी
बीएमसी प्रशासन का कहना है कि बुधवार तक मुंबई शहर क्षेत्र में 114.90 प्रतिशत नाला सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं पूर्वी उपनगरों में 95.54 प्रतिशत और पश्चिमी उपनगरों में 110.88 प्रतिशत सफाई का काम पूरा होने का दावा किया गया है।
प्रशासन के मुताबिक मीठी नदी से गाद निकालने का कार्य भी 74.73 प्रतिशत तक पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले सभी महत्वपूर्ण नालों की सफाई सुनिश्चित की जा रही है।
धारावी में धीमी रफ्तार से चल रहा सफाई अभियान
धारावी क्षेत्र में नाला सफाई का काम अभी भी जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून शुरू होने से पहले सफाई पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के कारण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।
धारावी का यह नाला माहिम खाड़ी में जाकर मिलता है और धारावी, सायन, माटुंगा, माहिम तथा बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) सहित मध्य मुंबई के घनी आबादी वाले इलाकों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो पिछले वर्षों की तरह इस बार भी घरों में पानी भरने की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
आदर्श नगर नाले में अब भी जमा है कचरा
गोवंडी के शिवाजी नगर स्थित आदर्श नगर नाले की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नाले की सफाई का केवल एक छोटा हिस्सा ही पूरा हुआ है।
पिछले मानसून में आदर्श नगर, शिवाजी नगर, बैंगनवाड़ी रोड और आसपास की बस्तियों में भारी जलभराव हुआ था। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। नागरिकों का कहना है कि इस बार भी स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
पोइसर नाले में भी दिखा तैरता कचरा
पश्चिमी उपनगर के पोइसर नाले में भी कचरा तैरता हुआ दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले की पर्याप्त सफाई नहीं होने के कारण हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की समस्या पैदा होती है।
लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते नाले को पूरी तरह साफ नहीं किया गया तो बारिश के दौरान आसपास के रिहायशी इलाकों में पानी भर सकता है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे नालों में कचरा न फेंकें और निर्धारित कूड़ादानों का उपयोग करें ताकि जल निकासी व्यवस्था बाधित न हो।
मानसून से पहले बढ़ी जवाबदेही की मांग
मुंबई में हर वर्ष नाला सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन मानसून आते ही कई इलाकों में जलजमाव की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में इस बार भी सफाई कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नागरिक संगठनों ने मांग की है कि नाला सफाई कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों तथा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

