सुरंगों में आग लगने पर तुरंत मिलेगी राहत, धुएं पर भी होगा प्रभावी नियंत्रण
मुंबई की नव-निर्मित कोस्टल रोड परियोजना की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा फैसला लिया है। कोस्टल रोड की सुरंगों (टनल) में किसी भी आपातकालीन स्थिति, विशेष रूप से आग लगने की घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मुंबई फायर ब्रिगेड के लिए अत्याधुनिक वॉटर मिस्ट टर्बाइन वाहन खरीदा जाएगा। इस विशेष वाहन की खरीद पर बीएमसी लगभग 6 करोड़ 32 लाख रुपये खर्च करेगी।
गुरुवार को स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। बीएमसी प्रशासन के अनुसार, वाहन की खरीद के बाद प्रमुख अग्निशमन अधिकारी की मौजूदगी में इसकी विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी।
खरीद से पहले होगी व्यापक तकनीकी जांच
बीएमसी के मुताबिक, वाहन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर परीक्षण किए जाएंगे। इनमें वाहन के ढांचे की प्रारंभिक जांच, संरचनात्मक कार्य, पैनल और उपकरणों की फिटिंग, पंप की क्षमता का परीक्षण, प्राइमर टेस्ट, रंगाई और अंतिम स्वीकृति जैसी सभी आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल रहेंगी।
दो वर्षों तक मिलेगा रखरखाव, कर्मचारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
इस आधुनिक वाहन के साथ दो वर्षों तक रखरखाव (मेंटेनेंस) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा मुंबई फायर ब्रिगेड के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस विशेष वाहन के संचालन और आपातकालीन परिस्थितियों में इसके प्रभावी उपयोग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
बंद सुरंगों में आग और धुएं पर करेगा तेजी से नियंत्रण
अतिरिक्त मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर ने बताया कि यह वॉटर मिस्ट टर्बाइन वाहन विशेष रूप से कोस्टल रोड की सुरंगों जैसी बंद जगहों में आग बुझाने और धुएं को नियंत्रित करने के लिए तैयार किया गया है। यह उच्च दबाव से पानी की महीन फुहार (वॉटर मिस्ट) का छिड़काव कर आग पर तेजी से काबू पाने में सक्षम होगा, जिससे राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।
मुंबई फायर ब्रिगेड की आपदा प्रबंधन क्षमता होगी मजबूत
बीएमसी का मानना है कि इस अत्याधुनिक वाहन के शामिल होने से मुंबई फायर ब्रिगेड की आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही कोस्टल रोड का उपयोग करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भविष्य में किसी भी टनल दुर्घटना या आगजनी की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेज और अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किए जा सकेंगे।

