Mumbai Cyber Fraud Report: 5 साल में 20,000 से अधिक मामले, 2,000 करोड़ का नुकसान
मुंबई में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। व्यवसायी, नौकरीपेशा, गृहिणियां, छात्र और रिटायर्ड बुजुर्ग—हर वर्ग का व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार बन रहा है। साल 2020 से अब तक शहर में 20,000 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें लोगों ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गंवाई है। रिकवरी इसके मुकाबले बेहद कम है।
ठग क्रेडिट-डेबिट कार्ड क्लोनिंग, डेटा चोरी, सिम स्वैप, स्किमिंग और फर्जी कॉल जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
क्लोनिंग, सिम स्वैप और OTP फ्रॉड के 4,132 केस
महाराष्ट्र साइबर सेल के आंकड़ों के अनुसार:
- 4,132 केस कार्ड क्लोनिंग, सिम स्वैप, स्किमिंग और ओटीपी शेयरिंग से जुड़े
- कुल नुकसान – 161.5 करोड़ रुपये
- रिकवरी – सिर्फ 4.8 करोड़ रुपये
बैंकों द्वारा RBI के “शून्य देयता नियम” को नजरअंदाज करने की वजह से ग्राहक और ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं।
मुंबई में दर्ज मामलों के आंकड़े (2020–2025)
मुंबई साइबर फ्रॉड मामलों का विवरण:
| वर्ष | मुकदमे | सॉल्व केस | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|---|
| 2020 | 2327 | 248 | 340 |
| 2021 | 2742 | 435 | 683 |
| 2022 | 4060 | 352 | 571 |
| 2023 | 3684 | 348 | 480 |
| 2024 | 4849 | 709 | 757 |
| 2025 | 1918 | 231 | 241 |
महाराष्ट्र में केस:
| वर्ष | केस दर्ज | सॉल्व केस | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|---|
| 2020 | 457 | 764 | 877 |
| 2021 | 4873 | 973 | 1388 |
| 2022 | 6267 | 699 | 994 |
| 2023 | 6580 | 539 | 660 |
| 2024 | 8974 | 910 | 1007 |
| 2025 | 3236 | 331 | 366 |
RBI के मौजूदा नियम — ग्राहक कब जिम्मेदार?
- 3 दिन के अंदर रिपोर्ट करने पर देयता शून्य
- 4–7 दिन में रिपोर्ट करने पर अधिकतम ₹25,000 की देयता
- ग्राहक तभी जिम्मेदार, जब वह जानबूझकर पिन/ओटीपी साझा करे
- बैंक को 10 कार्यदिवस में रकम लौटानी, और 90 दिन में केस निपटाना अनिवार्य
लेकिन हकीकत में कई बैंक इन नियमों का पालन नहीं करते।
बैंकों पर सवाल — ग्राहक पर अनावश्यक बोझ
वर्किंग वीमेन मुमताज खान ने बताया कि धोखाधड़ी होने पर बैंक ग्राहकों को ही दोषी ठहराते हैं।
कई पीड़ितों को नोटिस, वसूली कॉल और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि गलती सिस्टम की होती है।
साइबर एक्सपर्ट का दावा—OTP शेयरिंग को दोष देना गलत
साइबर एक्सपर्ट एडवोकेट लूसी मैसी के अनुसार:
- कार्ड डेटा चोरी स्किमर, मैलवेयर और डेटा लीक से होता है
- पीड़ित को ओटीपी शेयरिंग के लिए दोष देना गलत
- बैंक और पेमेंट सिस्टम की कमजोर सुरक्षा असली वजह
साकीनाका केस—एक घंटा और उड़ गए 2.5 लाख
व्यवसायी रोमलजीत कौर मक्कड़ के क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग हुई
और लखनऊ में POS मशीन से ₹2.5 लाख का फ्रॉड ट्रांजैक्शन कर लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदारी के दौरान उनका पिन सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो सकता है।
निष्कर्ष
मुंबई में साइबर फ्रॉड एक गंभीर संकट बन चुका है।
धीमी रिकवरी, बैंकों की लापरवाही और हाईटेक तरीके अपनाने वाले अपराधियों के कारण स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
जरूरत है—मजबूत साइबर सुरक्षा, कड़े बैंकिंग नियम और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की।

